रिपोर्ट – अमित कुमार!
बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने मीडिया से बातचीत में राज्य की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने वाले कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी।
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी स्वामी विवेकानंद के विचारों को याद करते हुए कहा कि युवा ही किसी भी राष्ट्र की असली शक्ति होते हैं और आज के समय में उनकी समस्याओं को समझकर उनका समाधान करना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसी सोच के साथ अब सरकार ने तय किया है कि शिक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी और मंत्री खुद स्कूलों और कॉलेजों में जाएंगे और छात्रों से सीधे बातचीत करेंगे। इसका उद्देश्य यह है कि बदलते समय में छात्रों की जरूरतें, चुनौतियां और उम्मीदें क्या हैं, इसे जमीन पर जाकर समझा जा सके और नीतियां उसी के अनुसार बनाई जा सकें।
शिक्षा विभाग के कामकाज को अधिक योजनाबद्ध और समयबद्ध बनाने के लिए राज्य के सभी 38 जिलों के अधिकारियों के साथ हाल ही में दो दिवसीय चिंतन शिविर भी आयोजित किया गया। इस शिविर का मुख्य मकसद सभी पदाधिकारियों की सोच को एक दिशा देना था ताकि विभाग में तालमेल बेहतर हो और हर काम एक तय समयसीमा में पूरा हो। मंत्री ने बताया कि राज्य स्तर पर शिक्षा विभाग के लिए एक उच्चस्तरीय परामर्शदात्री समिति भी बनाई जाएगी जो समय-समय पर विभाग को जरूरी मार्गदर्शन और सुझाव देगी।
आने वाले समय में बिहार की शिक्षा को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए तकनीक का सहारा लिया जाएगा। इसके तहत डिजिटल माध्यमों का विस्तार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग, शिक्षकों का क्षमता निर्माण और छात्र कल्याण से जुड़े कार्यक्रमों को तेजी से लागू किया जाएगा। साथ ही परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने पर विशेष जोर दिया गया है। पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी जैसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन देते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए सख्त कानूनों को बिहार में पूरी सख्ती से लागू किया जाएगा और परीक्षा सुधार के लिए एक विशेष समिति का गठन भी किया जाएगा ताकि सभी परीक्षाएं पूरी तरह निष्पक्ष और भरोसेमंद हो सकें।



