रिपोर्ट :- संतोष चौहान!
सुपौल :- बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के आदेश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव के निर्देश पर शनिवार को सुखपुर स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पैनल अधिवक्ता एवं पीएलवी (पारा विधिक स्वयंसेवक) के माध्यम से लोगों को ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकार, सरकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच और उन्हें उपलब्ध कानूनी सहायता के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई।
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (BSLSA) द्वारा शुरू की गई SITARA (Scheme for Integration of Transgender Persons and their Rehabilitation and Providing Access to Justice), 2023 योजना के बारे में लोगों को जानकारी दी गई। बताया गया कि यह योजना ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के सामाजिक एवं आर्थिक एकीकरण, पुनर्वास तथा उनके कानूनी अधिकारों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य ट्रांसजेंडर समुदाय को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है।
कार्यक्रम में बताया गया कि SITARA योजना ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के प्रभावी क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। योजना के माध्यम से ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
पैनल अधिवक्ता एवं पीएलवी ने बताया कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को समाज में समान अधिकार प्राप्त हैं। उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने, शिक्षा प्राप्त करने, रोजगार हासिल करने और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने का अधिकार है। किसी भी प्रकार के भेदभाव अथवा अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में वे विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
कार्यक्रम में सर्वेक्षण एवं पहचान के संबंध में भी जानकारी दी गई। बताया गया कि जिला स्तर पर ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें आवश्यक पहचान पत्र बनवाने में सहयोग किया जा सकता है, ताकि वे विभिन्न सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ प्राप्त कर सकें। पहचान से संबंधित प्रक्रिया में आने वाली परेशानियों के समाधान के लिए भी विधिक सहायता उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई।
शिक्षा एवं कौशल विकास को लेकर बताया गया कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश, छात्रवृत्ति, छात्रावास की सुविधा तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण से जोड़ने के लिए प्रयास किए जाने का प्रावधान है। इसके साथ ही उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने तथा कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी पहल की जाती है।
पुनर्वास के संबंध में बताया गया कि जरूरतमंद ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को आवास अथवा निवास संबंधी सहायता उपलब्ध कराने तथा आवश्यक परिस्थितियों में लिंग पुनर्मूल्यांकन सर्जरी (SRS) से संबंधित सहायता और मार्गदर्शन प्रदान करने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं बेहतर जीवन उपलब्ध कराने में सहयोग करना है।
कार्यक्रम के दौरान कानूनी सहायता के महत्व पर भी विशेष रूप से प्रकाश डाला गया। बताया गया कि यदि किसी ट्रांसजेंडर व्यक्ति के साथ अपराध या भेदभाव की घटना होती है तो वह प्राथमिकी (FIR) अथवा आपराधिक शिकायत दर्ज कराने में कानूनी सहायता ले सकता है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार जरूरतमंद लोगों को विधिक प्रक्रिया की जानकारी देने के साथ आवश्यकतानुसार सहायता उपलब्ध करा सकता है।
पैनल अधिवक्ता ने लोगों से अपील की कि ट्रांसजेंडर समुदाय के प्रति सामाजिक भेदभाव समाप्त करने और उन्हें समान अवसर देने के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जागरूकता के माध्यम से ही लोगों को उनके संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों की जानकारी मिल सकती है।
कार्यक्रम में पैनल अधिवक्ता शक्ति कुमारी सारिका, विधिक स्वयंसेवक मो. मोअजजम, ट्रांसजेंडर प्रतिनिधि शरवण कुमार सहित ग्रामीण कंचन झा, कंचन जायसवाल, लालू कामत एवं बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं। उपस्थित लोगों ने कार्यक्रम में दी गई जानकारी को गंभीरता से सुना और विधिक अधिकारों एवं उपलब्ध सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम के अंत में लोगों को बताया गया कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों, कानूनी सहायता एवं सरकारी योजनाओं से संबंधित अधिक जानकारी या किसी प्रकार की विधिक समस्या के समाधान के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल से संपर्क किया जा सकता है। जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के वंचित एवं जरूरतमंद वर्ग तक कानून और न्याय की पहुंच सुनिश्चित करना रहा।




