रिपोर्ट- अमित कुमार!
बिहार कर्मचारी चयन आयोग यानी BSSC की कार्यप्रणाली को लेकर छात्र संगठन छात्र सत्याग्रह ने पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार के सामने कई अहम मांगें रखीं। संगठन ने BSSC को संवैधानिक दर्जा देने की मांग करते हुए कहा कि आयोग को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त और पूरी तरह जवाबदेह बनाया जाए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।
वीओ-1:
छात्र सत्याग्रह के संस्थापक प्रभात कुमार चंद्रवंशी ने कहा कि हर वर्ष लाखों अभ्यर्थी BSSC की परीक्षाओं में शामिल होते हैं, लेकिन पेपर लीक, भर्ती में देरी और परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं के कारण युवाओं का भरोसा लगातार टूट रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग के पास पर्याप्त स्वायत्तता नहीं होने के कारण राजनीतिक हस्तक्षेप और प्रशासनिक मनमानी देखने को मिलती है। संगठन ने मांग की कि BSSC को संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत BPSC और UPSC की तरह संवैधानिक दर्जा दिया जाए।
वीओ-2:
छात्र सत्याग्रह ने कुल नौ प्रमुख मांगें भी रखीं। इनमें सभी परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित यानी CBT मोड में कराने, पेपर लीक मामलों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए सख्त कार्रवाई, भर्ती प्रक्रिया छह महीने के भीतर पूरी करने, छात्र सलाहकार बोर्ड के गठन, कोचिंग और अधिकारियों के कथित गठजोड़ की न्यायिक जांच, बड़े पैमाने पर रिक्तियों की अधिसूचना जारी करने, डिजिलॉकर आधारित दस्तावेज सत्यापन और परीक्षा केंद्रों पर लाइव सीसीटीवी निगरानी के साथ छात्र प्रतिनिधियों को पर्यवेक्षक बनाने जैसी मांगें शामिल हैं।
बाइट:
प्रभात कुमार चंद्रवंशी, संस्थापक – छात्र सत्याग्रह
वीओ-3:
संगठन ने कहा कि यदि सरकार ने इन मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं की तो पटना के गांधी मैदान में “बेरोजगार युवा महापंचायत” आयोजित की जाएगी। इसके बाद पूरे बिहार के जिला मुख्यालयों पर चरणबद्ध प्रदर्शन और सामूहिक अनशन किया जाएगा। छात्र सत्याग्रह ने प्रतियोगी छात्रों और युवा संगठनों से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील भी की है।



