रिपोर्ट – मिथुन कुमार!
नालंदा के बसवन बिगहा गांव की विश्वविख्यात बावन बूटी कला के लिए नई उम्मीद की किरण जगी है। वर्षों से अस्तित्व के संकट से जूझ रही इस पारंपरिक शिल्पकला को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिलने के बाद अब देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की तैयारी तेज हो गई है।
शुक्रवार को नालंदा की उप विकास आयुक्त सारा अशरफ ने बसवन बिगहा का दौरा कर बुनकरों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि GI टैग मिलना केवल नालंदा ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार के लिए गर्व की बात है। यह सम्मान उन बुनकर परिवारों की वर्षों की मेहनत, धैर्य और समर्पण का परिणाम है, जिन्होंने इस विरासत को जीवित रखा।
उद्योग विभाग, बिहारशरीफ के महाप्रबंधक धनजी ने बताया कि 1 अगस्त को केंद्र सरकार के वस्त्र मंत्रालय का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल बसवन बिगहा पहुंचकर बावन बूटी कला का अवलोकन करेगा। केंद्र और राज्य सरकार का उद्देश्य इस अनूठी कला को वैश्विक पहचान दिलाना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थापित करना है।
बुनकरों ने भी खुशी जताते हुए कहा कि GI टैग उनके लिए नई सुबह लेकर आया है। उन्हें उम्मीद है कि अब बावन बूटी साड़ियों की मांग देश-विदेश में बढ़ेगी, बेहतर मूल्य मिलेगा और नई पीढ़ी भी इस ऐतिहासिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित होगी।




