50 हजार रिश्वत लेते दारोगा जी गिरफ्तार, निगरानी की टीम ने रंगे हाथ दबोचा!

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रिपोर्ट – रुपेश कुमार!

औरंगाबाद बिहार के औरंगाबाद के रिसियप थाना के एक दारोगा ने मारपीट के मामले में पीड़ित से एक दो लाख की रिश्वत मांगी। मांग पूरी नही करने पर पोक्सो केस में फंसाने की धमकी दी। मामला एक लाख में दो किश्तों में देना तय हुआ। पीड़ित ने शुक्रवार को जैसे ही तय राशि की पहली किश्त के रूप में 50 हजार की नगदी दी, वैसे ही दारोगा को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने रंगेहाथ धर दबोंच लिया। निगरानी के हत्थें चढ़े दारोगा की पहचान रिसियप थाना के सब ईंस्पेक्टर उमेश कुमार के रूप में की गई है। गिरफ्तारी के बाद निगरानी की टीम रिश्वतखोर दारोगा को अपने साथ प्रदेश की राजधानी पटना स्थित निगरानी थाना ले गई है, जहां शनिवार को दारोगा को निगरानी की विशेष अदालत में पेशी के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया जाएगा।

आरोपी दारोगा उमेश कुमार

मारपीट मामले में राहत के नाम पर रिश्वत की मांग पर ननगरानी ने की कार्रवाई– निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना के पुलिस उपाधीक्षक संतोष कुमार ने बताया कि रिसियप थाना क्षेत्र के तेंदुआ गणपत निवासी ग्रामीण चिकित्सक डॉ. लक्ष्मण राम ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई कि नाली विवाद को लेकर हुई मारपीट के मामले में रिसियप थाना के दारोगा उमेश कुमार उनसे दो लाख की रिश्वत मांग रहे है। साथ ही रिश्वत नही देने पर पोक्सो केस में फंसाने की धमकी दे रहे है। इसके बाद ब्यूरो द्वारा शिकायत का सत्यापन कराया गया, जिसमें शिकायत सत्य पाई गई। शिकायत सही पाए जाने पर निगरानी ने कार्रवाई के लिए उनके नेतृत्व में एक टीम गठित की। साथ ही पीड़ित को दारोगा से लेनदेन करने को कहा गया। पीड़ित ने रिश्वत देने की हामी भरते हुए दारोगा से बात की और मामला दो किश्तों में एक लाख पर तय हुआ। निगरानी ने बिछाया जाल, रिश्वत लेते ही दारोगा को रंगेहाथ दबोंचा-रिश्वत की डील तय होने पर निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम पुलिस उपाधीक्षक संतोष कुमार के नेतृत्व में आगे की कार्रवाई करने शुक्रवार को पटना से रिसियप आई। इसके बाद पीड़ित लक्ष्मण राम दारोगा को रिश्वत देने रिसियप थाना पहुंचा। दारोगा पीड़ित को अपने साथ रिसियप थाना पीछे स्थित पंचायत सरकार भवन के पास ले गया, जहां रिश्वत की 50 हजार की रकम लेते ही पीछे पड़ी निगरानी की टीम ने दारोगा उमेश कुमार को रंगेहाथ दबोंच लिया। निगरानी की सात सदस्यीय टीम में डीएसपी के अलावा एएसआई रंजन कुमार, सतीश कुमार सिंह, एसआई संजीत कुमार, मो. नसीम अहमद, राहुल कुमार एवं राममोहन राम शामिल रहे। पीड़त ने बताई पूरी रामकहानी-पीड़ित लक्ष्मण राम ने बताया कि तेंदुआ गणपत गांव में नाली-गली के पुराने विवाद को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा था। इसी तनाव में 14 जुलाई को दोनों पक्षों में मारपीट हुई थी। मारपीट में वें घायल हो गए थे।डायल-112 की टीम उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले गई थी। वहीं दूसरे पक्ष की ओर से रंजीत राम की पत्नी रेशमी देवी ने भी रिसियप थाना में आवेदन देकर मामला दर्ज कराया था। दोनों मामलों की जांच की जिम्मेदारी एसआई उमेश कुमार को सौंपी गई थी।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि मामले की जांच के दौरान एसआई उमेश कुमार उन पर रिश्वत देने का लगातार दबाव बना रहे थे। कार्रवाई में राहत देने के लिए उन्होने दो लाख की मांग की। बाद में डेढ़ लाख में मामला सलटा देने की बात कहने लगे। मामले की निगरानी में शिकायत करने के बाद उन्होने दारोगा से सौदेबाजी की और दो किश्तों में एक लाख पर मामला तय हुआ। तय राशि की पहली किश्त 50 हजार रुपये देते हुए उन्होने अपने बालों पर हाथ फेरकर निगरानी की टीम को ईशारा किया। ईशारा पाते ही निगरानी की टीम ने रिश्वतखोर दारोगा को दबोंच लिया। पीड़ित ने बताया कि दारोगा ने उन्हे कहा था कि यह रकम उपर इंस्पेक्टर तक पहुंचेगी। सबको मैनेज करना पड़ता है। बहुत कम रकम में मामला सलटाने जा रहे है।

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