किताब छोड़ छात्रों ने थामा संघर्ष का रास्ता, स्कूल की बदहाली पर एसडीएम कार्यालय पहुंचा बच्चों का हुजूम!

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:- रवि शंकर अमित!

दिल्ली के छात्र आंदोलनों की गूंज अब ग्रामीण इलाकों तक सुनाई देने लगी है। गया जिले के टिकारी अनुमंडल क्षेत्र में मिडिल स्कूल सिमुआरा के 40 से अधिक छात्र-छात्राएं बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर सीधे एसडीएम कार्यालय पहुंच गए। स्कूल की बदहाल व्यवस्था से नाराज बच्चों ने नारेबाजी कर प्रशासन से जवाब मांगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम ने जांच समिति गठित कर चार दिनों के भीतर समस्याओं के समाधान का निर्देश दिया। मंगलवार को मिडिल स्कूल सिमुआरा के 40 से अधिक छात्र-छात्राएं स्कूल में व्याप्त अव्यवस्थाओं के खिलाफ टिकारी अनुमंडल कार्यालय पहुंच गए। हाथों में आवेदन और मन में अपनी समस्याओं का समाधान कराने की उम्मीद लिए बच्चों ने प्रशासन के समक्ष अपनी आवाज बुलंद की। बड़ी संख्या में छात्रों के पहुंचने से अनुमंडल कार्यालय में कुछ देर के लिए हलचल मच गई। उस समय एसडीएम प्रवीण कुंदन क्षेत्र भ्रमण पर थे। छात्रों की शिकायत सुनने के लिए कार्यपालक दंडाधिकारी रंजीत कुमार सिंह को भेजा गया, लेकिन छात्र एसडीएम से सीधे मुलाकात करने की मांग पर डटे रहे। गुरारू से लौटने के बाद एसडीएम ने स्वयं छात्रों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं विस्तार से सुनीं। छात्रों ने बताया कि स्कूल में लंबे समय से कई बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। मिड-डे मील की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है, चापाकल खराब पड़ा है, शौचालयों की नियमित सफाई नहीं होती और खेल सामग्री भी उपलब्ध नहीं कराई जाती। उनका कहना था कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ, इसलिए उन्हें प्रशासन तक पहुंचना पड़ा। मामले को गंभीर मानते हुए एसडीएम प्रवीण कुंदन ने स्कूल के प्रधानाध्यापक को चार दिनों के भीतर सभी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही छात्रों की लिखित शिकायत की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया। समिति में कार्यपालक दंडाधिकारी रंजीत कुमार सिंह, टिकारी बीडीओ योगेंद्र पासवान और एडीएसओ चंदन कुमार को शामिल किया गया है। समिति अपनी रिपोर्ट एसडीएम को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। यह घटना बताती है कि नई पीढ़ी अब केवल समस्याएं सहने के बजाय अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही है। बेहतर शिक्षा, स्वच्छ परिसर और मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर छात्रों का प्रशासन तक पहुंचना ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती जागरूकता का संकेत माना जा रहा है। शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि छात्रों की आवाज को गंभीरता से सुनना और समय पर समस्याओं का समाधान करना बेहतर शैक्षणिक वातावरण के लिए जरूरी है। वहीं इस संबंध में एसडीएम प्रवीण कुंदन ने कहा कि छात्रों की समस्या सुनने के बाद स्कूल के प्राचार्य को चार दिनों के अंदर सभी समस्याओं का समाधान करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि तीन सदस्यीय टीम गठित कर अनियमितता की जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।

रिपोर्ट अभिषेक कुमार
गयाजी

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