रिपोर्ट :- संतोष चौहान
सुपौल :- जिले के मरौना प्रखंड अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय कोनी अमरदास टोला में मध्याह्न भोजन योजना में कथित अनियमितता, शिक्षण कार्य में लापरवाही और छात्र-छात्राओं को सरकार एवं उच्चाधिकारियों के विरुद्ध भड़काने के आरोप में विद्यालय के प्रधानाध्यापक भगवानी मंडल को निलंबित कर दिया गया है। जिला शिक्षा विभाग, सुपौल की ओर से जारी आदेश में प्रधानाध्यापक को निलंबित करते हुए उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही शुरू करने का निर्णय भी लिया गया है।
विभागीय आदेश के अनुसार, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मरौना ने 25 जुलाई 2026 को पत्र के माध्यम से विद्यालय की जांच से संबंधित प्रतिवेदन जिला शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराया था। इससे पूर्व 15 जुलाई 2026 को प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने अपराह्न करीब 1:30 बजे उत्क्रमित मध्य विद्यालय कोनी अमरदास टोला का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान विद्यालय की स्थिति देखकर अधिकारी ने कई अनियमितताएं पाईं।
निरीक्षण के समय विद्यालय के सभी छात्र-छात्राएं विद्यालय परिसर में इधर-उधर घूमते हुए पाए गए। जब बच्चों से इसके बारे में जानकारी ली गई तो छात्राओं ने बताया कि उस समय तक उन्हें मध्याह्न भोजन नहीं कराया गया था। विभागीय जांच में यह भी सामने आया कि बच्चों की उपस्थिति पंजी पर उनकी उपस्थिति शिक्षक द्वारा दर्ज नहीं की गई थी। वहीं, प्रधानाध्यापक की ओर से छात्र उपस्थिति पंजी में उपस्थित अथवा अनुपस्थित के स्थान पर डॉट-डॉट अंकित किया गया था।
विद्यालय में पाई गई इन अनियमितताओं को लेकर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने 16 जुलाई को प्रधानाध्यापक भगवानी मंडल से स्पष्टीकरण मांगा था। प्रधानाध्यापक ने 20 जुलाई को अपना स्पष्टीकरण विभाग के समक्ष प्रस्तुत किया। हालांकि, विभागीय अधिकारियों ने उनके द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं पाया।
आदेश में प्रधानाध्यापक पर एक अन्य गंभीर आरोप का भी उल्लेख किया गया है। विभाग के अनुसार, प्रधानाध्यापक द्वारा विद्यालय में बच्चों के साथ बैठकर विभिन्न प्रकार की गतिविधियों के दौरान सरकार के खिलाफ कथित रूप से अभद्र एवं अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया। इस संबंध में ऑडियो साक्ष्य प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मरौना के पास सुरक्षित होने की बात आदेश में कही गई है।
जिला शिक्षा विभाग ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रधानाध्यापक पर मध्याह्न भोजन योजना को बंद रखने एवं उसमें अनियमितता बरतने, विद्यालय में शिक्षण कार्य में रुचि नहीं लेने, छात्र-छात्राओं को सरकार एवं उच्चाधिकारियों के विरुद्ध भड़काने तथा कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही बरतने जैसे आरोप लगाए हैं।
इन आरोपों के आलोक में बिहार सरकारी सेवक, वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियमावली, 2005 की धारा 09 के तहत प्रधानाध्यापक भगवानी मंडल को निलंबित कर विभागीय कार्यवाही के अधीन करने का निर्णय लिया गया है। जिला शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय, निर्मली निर्धारित किया गया है।
निलंबन अवधि में उन्हें निर्धारित मुख्यालय में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करनी होगी। आदेश के अनुसार, निर्धारित मुख्यालय से निर्गत अनुपस्थिति विवरणी के आधार पर बिहार सरकारी सेवक, वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियमावली, 2005 की धारा 10 के तहत नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। यह भत्ता मूल विद्यालय की स्थापना मद से देय होने की बात कही गई है।
विभाग ने प्रधानाध्यापक के विरुद्ध आरोप पत्र अलग से निर्गत किए जाने की भी जानकारी दी है। यानी निलंबन के बाद विभागीय जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और लगाए गए आरोपों से संबंधित तथ्यों एवं साक्ष्यों की जांच की जाएगी।
जारी आदेश की प्रति प्रधानाध्यापक भगवानी मंडल, संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मरौना एवं निर्मली, कोषागार पदाधिकारी सुपौल सहित संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है। प्रधानाध्यापक को निर्देश दिया गया है कि वे विद्यालय का संपूर्ण प्रभार विद्यालय के वरीय शिक्षक को सौंपने के बाद निलंबन मुख्यालय में अपना योगदान सुनिश्चित करें।
शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई के बाद विद्यालय में मध्याह्न भोजन योजना और शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर विभागीय निगरानी बढ़ने की उम्मीद है। विभागीय कार्यवाही में प्रधानाध्यापक पर लगाए गए आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल विभाग ने आरोपों को गंभीर मानते हुए निलंबन की कार्रवाई की है।



