कोशी बराज में जलस्तर बढ़ने के बाद नजर आई गंगा डॉल्फिन, बढ़ी संरक्षण की उम्मीद!

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रिपोर्ट:- संतोष चौहान

सुपौल :- कोशी नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी के बीच गुरुवार को भारत – नेपाल सीमा पर अवस्थित कोशी बराज के डाउन स्ट्रीम में एक बार फिर गंगा डॉल्फिन देखने को मिला। डॉल्फिन के नजर आने के बाद स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल है और क्षेत्र में इसकी चर्चा तेज हो गई है। इससे पहले भी इस इलाके में डॉल्फिन देखी जा चुकी है।

पहले भी मिल चुके हैं डॉल्फिन के प्रमाण

वन्यजीव अभ्यारण्य पटना और दिल्ली की संयुक्त टीम ने वर्ष 2024 में तीन दिवसीय कोशी प्रवास के दौरान पक्षियों की गणना के साथ कोशी नदी में डॉल्फिन की मौजूदगी की पुष्टि की थी। टीम ने कोशी बराज से कोशी महासेतु तक के क्षेत्र को डॉल्फिन के लिए उपयुक्त और संरक्षित क्षेत्र बताया था। साथ ही भविष्य में इनकी संख्या बढ़ने की संभावना भी जताई थी।
इस दौरान बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्सरण विभाग, वीरपुर के मुख्य अभियंता संजीव शैलेश ने कहा कि कोशी बराज के पास कई बार देखा जा चुका है डॉल्फिन को।
उन्होंने कहा कि स्वयं पांच से छह बार डॉल्फिन को देखा हुं। उनके अनुसार यह गंगा डॉल्फिन है, क्योंकि इसका आकार अपेक्षाकृत बड़ा है। यह प्रायः कोशी बराज के 26, 27 एवं 36 नंबर फाटक के आसपास दिखाई देती है। हालांकि इसकी संख्या के बारे में कुछ स्पष्ट नहीं कहा जा सकता है।
मुख्य अभियंता ने बताया कि फिलहाल डॉल्फिन संरक्षण के लिए विभाग के स्तर पर कोई विशेष व्यवस्था नहीं है। फिर भी कोशी नदी में गंगा डॉल्फिन का दिखाई देना पर्यावरण और जैव विविधता की दृष्टि से सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। स्थानीय लोगों ने भी इस दुर्लभ जलीय जीव के संरक्षण के लिए जिला प्रशासन एवं सरकार से प्रभावी पहल करने की मांग की है।

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