रिपोर्ट – ऋषभ कुमार!
बिहार के वैशाली से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ भ्रष्टाचार के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU ने एक बड़ी कार्रवाई की है। हाजीपुर नगर परिषद के लेखपाल मनीष कुमार के ठिकानों पर EOU की टीम ने ताबड़तोड़ छापेमारी की है। कभी अनुकंपा पर चपरासी की नौकरी से शुरुआत करने वाले मनीष कुमार आज करोड़ों की काली कमाई के मालिक बन बैठे हैं। EOU की 9 घंटे चली इस रेड में आलीशान बंगले से लेकर जमीन, जेवरात और ठेकेदारों से कनेक्शन के कई चौंकाने वाले सबूत मिले हैं।
हाजीपुर नगर परिषद में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब गुरुवार सुबह करीब 7:30 बजे आर्थिक अपराध इकाई की टीम भारी पुलिस बल के साथ लेखपाल मनीष कुमार के ठिकानों पर धमक गई। मुजफ्फरपुर EOU की टीम ने एक साथ मनीष कुमार के बागमली स्थित आलीशान आवास और नगर परिषद कार्यालय में छापेमारी शुरू की। विशेष न्यायालय निगरानी से सर्च वारंट मिलने के बाद की गई इस कार्रवाई से इलाके में सनसनी फैल गई। कुल काली कमाई: दो करोड़ दो लाख से ज्यादा, जो ज्ञात आय से 208.57 प्रतिशत ज्यादा संपत्ति है , साथ ही साढ़े छः लाख के सोने के जेवरात, 50 हजार कैश, दस्तावेज: LIC के पेपर्स, 2 कीमती जमीनों के कागजात एक लग्जरी ‘थार’ गाड़ी (ठेकेदार के नाम पर दर्ज)
इत्यादि जब्त की गई है!
EOU के डीएसपी सीपी यादव के नेतृत्व में करीब 10 अधिकारियों की टीम ने 9 घंटे तक चप्पा-चप्पा छाना। छापेमारी के वक्त लेखपाल मनीष कुमार घर से फरार था, लेकिन उसकी पत्नी, मां और बेटे की मौजूदगी में तलाशी ली गई।
हैरानी की बात तो यह है कि जांच के दौरान घर के बाहर खड़ी एक ‘थार’ गाड़ी मिली, जो हाजीपुर जढुआ के एक ठेकेदार के नाम पर थी। इसके बाद टीम ने ठेकेदार के ठिकाने पर भी रेड की। सूत्रों के मुताबिक, नगर परिषद के इस लेखपाल और ठेकेदारों के बीच करोड़ों के खेल और अवैध लेन-देन के कई पुख्ता सबूत EOU के हाथ लगे हैं।
चपरासी से करोड़पति बनने की यह कहानी पूरे शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, साल 2008 में मनीष कुमार को पिता के निधन के बाद अनुकंपा पर पीउन (चपरासी) की नौकरी मिली थी। लेकिन देखते ही देखते वो प्रमोशन पाकर लेखपाल बन गया और महज 18 साल की नौकरी में भ्रष्टाचार की सीढ़ियां चढ़ते हुए करोड़ों की अकूत संपत्ति खड़ी कर ली!
फिलहाल EOU ने दफ्तर से कई अहम दस्तावेज जब्त किए हैं और कर्मचारियों के बयान भी रिकॉर्ड किए हैं। मनीष कुमार की गिरफ्तारी भले ही नहीं हुई हो, लेकिन EOU ने उसे 15 जून को उपस्थित होने का कड़ा नोटिस थमा दिया है। अब देखना यह होगा कि इस बड़ी मछली के जाल में फंसने के बाद नगर परिषद के और कितने सफ़ेदफोश का पर्दाफाश होता है?
वैशाली से शंखनाद संवाददाता ऋषभ कुमार की एक्सक्लुसिव रिपोर्ट!




