बेतिया -गंडक नदी में वन विभाग द्वारा छोड़े गये घड़ियाल के 31 बच्चे!

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रिपोर्ट – मनोज कुमार!

गंडक नदी में घड़ियाल संरक्षण प्रयासों के अंतर्गत बेतिया वन प्रमंडल के बगहा रेंज स्थित रतवल पुल के निकट वर्ष 2026 के प्रजनन सत्र के प्रथम घड़ियाल घोंसले से 31 शावकों का सफल उद्भवन हुआ। तत्पश्चात सभी शावकों को वन विभाग एवं वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) की देखरेख में उनके प्राकृतिक आवास, गंडक नदी, में सुरक्षित रूप से छोड़ा गया।

शावकों को नदी में छोड़ने के कार्यक्रम में क्षेत्र निदेशक (CF) श्री गौरव ओझा, वन प्रमंडल पदाधिकारी (DFO) श्री पंकज कुमार, वन प्रक्षेत्र (रेंज) श्रीमान मलाकार, वन विभाग के कर्मियों तथा वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर अधिकारियों ने घड़ियाल संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला तथा इस उपलब्धि को वन विभाग एवं WTI के संयुक्त संरक्षण प्रयासों का परिणाम बताया।

घोंसले का पता अप्रैल-मई के दौरान वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) एवं बिहार वन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किए गए गहन क्षेत्रीय सर्वेक्षणों के दौरान लगाया गया। वर्तमान प्रजनन सत्र में अब तक गंडक नदी में कुल पाँच घड़ियाल घोंसलों की पहचान की जा चुकी है, जिनकी नियमित निगरानी एवं सुरक्षा की जा रही है।

घड़ियाल को IUCN द्वारा अत्यंत संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया है तथा भारत में यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के अंतर्गत संरक्षित प्रजाति है। वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया पिछले एक दशक से गंडक नदी क्षेत्र में इसके संरक्षण हेतु कार्यरत है। वर्तमान में गंडक नदी देश में घड़ियालों का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण गढ़ मानी जाती है और यह प्रजाति की प्रमुख प्रजनन आबादियों में से एक को संरक्षण प्रदान करती है।
घड़ियाल शावकों का यह सफल उद्भवन तथा उन्हें प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से छोड़ा जाना संरक्षण प्रयासों की सफलता का प्रतीक है तथा इस दुर्लभ नदीय सरीसृप के दीर्घकालिक संरक्षण के प्रति नई आशा का संचार करता है।

गंडक नदी में छोड़े गए 31 घड़ियाल शावक, संरक्षण अभियान को मिली नई मजबूती

वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) की टीम भी मौजूद रही।

घड़ियाल पुनर्वास कार्यक्रम मुख्य वन संरक्षक (सीएफ), वन प्रमंडल पदाधिकारी (डीएफओ) एवं अन्य वन अधिकारियों की निगरानी में संपन्न हुआ। अधिकारियों ने बताया कि घड़ियाल देश के अत्यंत दुर्लभ और संरक्षित जलीय जीवों में शामिल है, जिसकी संख्या बढ़ाने और प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

रेंजर मलाकार ने बताया कि वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित और देखरेख में पाले गए इन शावकों को गंडक नदी में छोड़ा गया है, ताकि वे प्राकृतिक वातावरण में विकसित हो सकें। उन्होंने कहा कि इस पहल से न केवल घड़ियालों की आबादी बढ़ेगी, बल्कि नदी के पारिस्थितिक तंत्र को भी मजबूती मिलेगी।

कार्यक्रम के दौरान डब्ल्यूटीआई की विशेषज्ञ टीम ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया। विशेषज्ञों ने घड़ियाल संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन दुर्लभ जीवों के अस्तित्व के लिए स्वच्छ नदी, सुरक्षित आवास और स्थानीय समुदायों की सहभागिता बेहद आवश्यक है। उन्होंने जन-जागरूकता को भी संरक्षण का महत्वपूर्ण आधार बताया।

वन अधिकारियों ने कहा कि वाल्मीकि टाइगर रिजर्व जैव विविधता संरक्षण के लिए देश के प्रमुख क्षेत्रों में से एक है। यहां वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। गंडक नदी में 31 घड़ियाल शावकों को छोड़े जाने से वन्यजीव प्रेमियों, पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल देखा गया। यह पहल क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण को नई मजबूती देने वाली साबित होगी।

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