आरा/आशुतोष पाण्डेय
सदर अस्पताल आरा में मानवता शर्मसार: लावारिस घायल युवक तीन दिनों से खंडहरनुमा पुराने इमरजेंसी वॉर्ड में तड़पता रहा, इलाज तक नसीब नहीं
आरा। भोजपुर जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल आरा में मंगलवार की देर रात मानवता को शर्मसार करने वाला भयावह दृश्य सामने आया। रात लगभग 1 बजे पुराने इमरजेंसी वॉर्ड, जिसे अब गोदाम के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, वहां बिना बिजली, बिना पंखा, बिना बल्ब और घने अंधेरे में एक घायल युवक को लावारिस की तरह फेंक कर छोड़ दिया गया था।
घायल युवक की पहचान रोहित पांडेय, पिता स्वर्गीय संतोष पांडेय, निवासी—इमादपुर थाना, तरारी प्रखंड, जिला भोजपुर के रूप में हुई है। बताया जाता है कि वह सामाजिक व पारिवारिक तौर पर पूरी तरह से उपेक्षित रहा है। पुश्तैनी जमीन न होने और परिवार टूट जाने के कारण वह वर्षों से अपने गांव भी नहीं लौटा था।
रेल से गिरकर हुआ घायल, पर अस्पताल में नहीं मिला इलाज
युवक का कहना है कि वह आरा जंक्शन पर पानी की बोतल बेचकर जीविका चलाता है। कुछ दिन पहले पानी बेचने के दौरान वह ट्रेन से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। उसके मुताबिक उसे पुलिस द्वारा (आरपीएफ या जीआरपी—स्पष्ट नहीं) घायल अवस्था में सदर अस्पताल पहुंचाया गया, पर उसके बाद कोई भी दोबारा नहीं लौटा।
बीते तीन से चार दिनों से वह वहीं बिना इलाज, बिना दवा, बिना ड्रेसिंग, बिना भोजन—अंधेरे और बदबूदार खंडहरनुमा कमरे में तड़पता पड़ा रहा।
उसका एक हाथ टूट चुका है, कलाई गंभीर रूप से घायल है और पैर में गहरा घाव बन गया है। चेहरे पर भी चोटों के गहरे निशान मौजूद हैं।
“लोग हमें नशेड़ी या पागल समझते हैं…”
युवक रोते हुए बताता है—
“बचपन में पिता का देहांत हो गया। मां ने दूसरी शादी कर ली। तब से अकेला हूं। रेलवे स्टेशन पर पानी बेचकर जीता था। ट्रेन से गिर गया, फिर पुलिस अस्पताल छोड़ गई पर कोई लौटकर नहीं आया। तीन-चार दिन से खाना भी नहीं मिला। लोग हमें नशेड़ी, पागल, चोर समझते हैं, जबकि मेरा एक हाथ-पैर चल नहीं रहा। मैं मर जाऊं तो शायद ठीक ही हो…”
घायल युवक बार-बार अस्पताल परिसर में चिल्लाते हुए मदद मांग रहा था।
सामाजिक कार्यकर्ता ने दिखाई मानवता
घटना की जानकारी मिलने पर संत रविदास जनसेवा संगठन, भोजपुर के संस्थापक महासचिव एवं समाजसेवी अमरदीप कुमार जय मौके पर पहुंचे और घायल युवक को पानी, चाय एवं भोजन उपलब्ध कराया। उन्होंने इसे अस्पताल तंत्र की बड़ी लापरवाही बताया और जिला प्रशासन से तुरंत चिकित्सा उपलब्ध कराने की मांग की।
अस्पताल प्रशासन व पुलिस पर गंभीर सवाल
घायल व्यक्ति को किस पुलिस ने छोड़ा—आरपीएफ या जीआरपी?
तीन-चार दिनों तक अस्पताल स्टाफ को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई?
क्यों एक घायल युवक को पुराने, बंद पड़े, अंधेरे वार्ड में फेंक दिया गया?
एक्स-रे, प्राथमिक उपचार, ड्रेसिंग तक क्यों नहीं हुई?
घटना ने सदर अस्पताल आरा के स्वास्थ्य तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।




