:- रवि शंकर अमित/बबलू राय!
बेगूसराय सदर अस्पताल एक बार फिर सवालों के घेरे में है। यहां सर्पदंश से युवक की मौत के बाद शव ले जाने के लिए परिजनों को सरकारी एंबुलेंस तक नसीब नहीं हुआ। घंटों तक अस्पताल परिसर में भटकने के बाद आखिरकार गरीब परिवार को 25 सौ रुपए देकर प्राइवेट एंबुलेंस करना पड़ा। इस घटना के बाद परिजनों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।मामला बलिया थाना क्षेत्र के भवानंदपुर पंचायत स्थित वार्ड संख्या-1 भवानंदपुर गांव का है। जहां सर्पदंश से 22 वर्षीय युवक रामजी शर्मा की मौत हो गई। मृतक की पहचान गांव निवासी बौनु शर्मा के पुत्र रामजी शर्मा के रूप में की गई है। घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।परिजनों के अनुसार रामजी शर्मा रात में अपनी पत्नी और बच्चों के साथ घर में चारपाई पर सोए हुए थे। तभी देर रात किसी विषैले सांप ने उन्हें डस लिया। युवक ने इसकी जानकारी पत्नी को दी, जिसके बाद परिजन उसे गांव में झाड़-फूंक के लिए ओझा के पास ले गए। करीब तीन घंटे तक झाड़-फूंक चलता रहा, लेकिन हालत बिगड़ती चली गई।इसके बाद परिजन युवक को इलाज के लिए बलिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर स्थिति को देखते हुए बेगूसराय सदर अस्पताल रेफर कर दिया। लेकिन सदर अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने जांच के बाद युवक को मृत घोषित कर दिया। मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया।
वहीं पोस्टमार्टम के बाद शव को गांव ले जाने के लिए परिजन घंटों तक सरकारी एंबुलेंस का इंतजार करते रहे। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई सहायता नहीं मिली। मजबूर होकर गरीब परिवार को 25 सौ रुपए खर्च कर प्राइवेट एंबुलेंस करना पड़ा।सरकार कहती है कि गरीबों के लिए सारी सुविधा उपलब्ध है, लेकिन यहां गरीब दर-दर भटकने को मजबूर हैं। अगर सरकारी एंबुलेंस मिल जाती तो हमें कर्ज लेकर प्राइवेट गाड़ी नहीं करनी पड़ती।”परिजनों ने बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को दयनीय बताते हुए कहा कि सरकारी दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। मृतक अपने पीछे पत्नी, एक छोटा पुत्र और एक पुत्री छोड़ गया है। जैसे ही शव गांव पहुंचा, ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और पूरे गांव में मातमी सन्नाटा छा गया।घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया और पूरे मामले की जांच में जुट गई है। वहीं इस घटना ने एक बार फिर बेगूसराय सदर अस्पताल की व्यवस्थाओं पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।अब देखना होगा कि गरीब परिवार की इस पीड़ा के बाद स्वास्थ्य विभाग जागता है या फिर सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर यूं ही बना रहेगा।
बाइट – रुपेश कुमार, परिजन
बाइट – ग्रामीण




