निजी नर्सिंग होम में इलाज के दौरान बच्चे की मौत, सीपीआईएम ने की जांच व कार्रवाई की मांग!

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रिपोर्टर– राजीव कुमार झा

कमलारोड स्थित नर्सिंग होम पर लापरवाही का आरोप, अवैध चिकित्सा संस्थाओं पर लगाम लगाने की अपील

इलाज में लापरवाही से बच्चे की जान गई, स्वास्थ्य माफिया पर शिकंजा कसे प्रशासन

ऐंकर– मधुबनी जिले मे अवैध नरसिग होम का मूद्दा लंबे समय से उठाया जाता रहा है। फिर एक बार इस बात को लेकर फिर जिले के जयनगर मे मामला गरमाया देखा जा रहा है। जहां कमलारोड स्थित एक निजी नर्सिंग होम में इलाज के दौरान एक बच्चे की मौत के बाद जिले के स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खरे हो रहे है। इस घटना ने शहर के चिकित्सा व्यवस्था की फिर से पोल खोल दी है, जहां कुकुरमुत्तों की तरह उग आए निजी क्लिनिक, नर्सिंग होम और अस्पताल चिकित्सा के नाम पर लूट मचाए हुए हैं। तो वहीं, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की जयनगर लोकल कमिटी ने सरकार और प्रशासन से तत्काल जांच कर अवैध चिकित्सा संस्थानो पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बच्चे को नर्सिंग होम में इलाज को लेकर भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। सीपीआईएम नेताओं ने इसे लापरवाही का परिणाम बताते हुए कहा है कि जयनगर शहर में बिना किसी नियंत्रण के निजी चिकित्सा संस्थाएं संचालित हो रही हैं। इनमें योग्य डॉक्टरों, सुविधाओं और दवाओं की कमी है, फिर भी मरीजों से मनमाने ढंग से वसूली की जा रही है। पार्टी का आरोप है कि ये संस्थाएं अवैध रूप से संचालित हो रही हैं और स्वास्थ्य सेवाओं को व्यापार बना दिया गया है। सीपीआईएम जयनगर लोकल कमिटी के सचिव व प्रवक्ता कुमार राणा प्रताप सिंह ने बताया है कि यह पहली घटना नहीं है। जयनगर में चिकित्सा के नाम पर व्यवसाय तेजी से फैल रहा है, लेकिन इन नीजी अस्पतालों मे गुणवत्ता के नाम पर शून्य है। सरकार और प्रशासनिक पदाधिकारियों को ऐसे अस्पतालों के लापरवाही से सबक लेना चाहिए। नियमित जांच अभियान चलाकर ऐसे अस्पतालों मे मूलभूत चिकित्सा सुविधाएं बहाल की जाएं। एवं वैध क्लिनिक, नर्सिंग होम और अस्पतालों पर तत्काल छापेमारी करते हुए दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की जाए। पार्टी द्वारा लंबे समय से इस मुद्दे को लेकर आवाज उठाया जा रहा है, लेकिन अनुमंडल प्रशासन उदासीन बना हुआ है। जयनगर जैसे छोटे शहर में सरकारी अस्पताल पहले ही अपर्याप्त हैं। निजी संस्थाओं ने इस कमी का फायदा उठा रही है, ऐसे अस्पतालों के द्वाराले लूट एवं लापरवाही से आम जनता प्रभावित हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार में निजी चिकित्सा संस्थाओं का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पंजीकरण या लाइसेंस के बिना चल रही है। जयनगर में कमलारोड, स्टेशन रोड और बाजार क्षेत्रों में दर्जनों ऐसी संस्थाएं हैं, जो बिना उचित संसाधन व चिकित्सक के संचालित हो रही हैं। सीपीआईएम ने मांग की है कि स्वास्थ्य विभाग के द्वारा विशेष जांच टीम गठित की जाए। ऐसे सभी निजी संस्थाओं का भौतिक सत्यापन हो और मानकों पर खरा न उतरने वाले अस्पतालों को सील कर दिया जाए। साथ ही, पीड़ित बच्चे के परिवार को उचित मुआवजा और दोषी डॉक्टरों पर मुकदमा दर्ज हो। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा। यह घटना न केवल जयनगर, बल्कि पूरे मधुबनी जिले के लिए चिंताजनक है। सरकार को चिकित्सा सेवाओं को सार्वजनिक बनाने और निजी क्षेत्र पर नियंत्रण सुनिश्चित करना होगा, ताकि ऐसी त्रासदियां दोबारा न हों। स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन से अपील की है कि स्वास्थ्य सेवाओं को लूट का अड्डा न बनने दिया जाय।

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