धर्मेंद्र कुमार की रिपोर्ट।
पूर्वी चम्पारण जिले मोतिहारी के सदर अस्पताल में इन दिनों इलाज से ज्यादा पैरवी काम कर रही है। कड़ाके की ठंड में जहां मरीजों को बुनियादी सुविधा के रूप में कंबल और गर्माहट मिलनी चाहिए, वहां हालात इसके ठीक उलट नजर आ रहे हैं। यहां सुविधा उसी को मिल रही है, जिसकी पहुंच ऊंची है। जिनकी कोई सिफारिश नहीं, वे ठंड में ठिठुरने को मजबूर हैं। जी हां आपको बता दे सदर अस्पताल में भर्ती मरीजों की स्थिति देखकर यह साफ जाहिर होता है कि अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्थाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। ठंड से बचाव के लिए न तो पर्याप्त कंबल उपलब्ध हैं और न ही हीटर की समुचित व्यवस्था। मजबूरन मरीजों और उनके परिजनों को घर से कंबल मंगाकर काम चलाना पड़ रहा है।
नगर निगम की ओर से अस्पताल परिसर स्थित रैन बसेरा में अलाव की व्यवस्था की जिम्मेदारी है, लेकिन यह व्यवस्था भी केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। दो-चार लकड़ियों को कभी-कभार जलाकर जिम्मेदारी निभा दी जाती है, जिससे ठंड से कोई राहत नहीं मिलती। मोतिहारी संवाददाता धर्मेंद्र कुमार ने जब सदर अस्पताल की जमीनी हकीकत कैमरे में कैद की, तो मरीजों की पीड़ा सामने आई। मरीज युगंती देवी बताती हैं कि पति की तबीयत खराब होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन कंबल नहीं मिला। मजबूरन बाहर से खरीदना पड़ा।वहीं मरीज श्री नारायण का कहना है कि काफी गुहार लगाने के बाद नर्स ने कंबल दिया।
मरीज भूलन महतो ठंड लगने से बीमार होकर भर्ती हुए, लेकिन अस्पताल से कोई गर्म व्यवस्था नहीं मिली, इसलिए घर से कंबल मंगवाना पड़ा। हालांकि, सदर अस्पताल के मैनेजर कौशल किशोर दुबे व्यवस्था को संतोषजनक बताते हैं। उनका कहना है कि सभी मरीजों के लिए कंबल की व्यवस्था उपलब्ध है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि रैन बसेरा में नगर निगम द्वारा अलाव जलाया जा रहा है। हालांकि मौके की सच्चाई उनके दावों से अलग नजर आई।
गौर करने वाली बात यह भी है कि सदर अस्पताल परिसर स्थित आश्रम स्थल में कंबल, बेड और हीटर की समुचित व्यवस्था देखी गई, जबकि आम मरीज बुनियादी सुविधा के लिए तरसते रहे। कुल मिलाकर, मोतिहारी सदर अस्पताल में सुविधाएं जरूरत के आधार पर नहीं, बल्कि पैरवी के आधार पर मिलती दिख रही हैं। ठंड के इस मौसम में यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।




