शकील की रिपोर्ट

सूचना प्रौद्योगिकी एवं अंतरिक्ष विज्ञान में आगे आएं विश्व की नई पीढ़ी ,विश्व विद्यार्थी दिवस पर सत्याग्रह रिसर्च फाउंडेशन एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों ने छात्र छात्राओं से की अपील,
बेतिया- दिनांक 15 अक्टूबर 2021 को विश्व के महान वैज्ञानिक सहा भारत सरकार के पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के जन्मदिवस,विश्व छात्र दिवस के अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों बुद्धिजीवियों एवं छात्र छात्राओं ने भाग लिया इस अवसर पर विश्व के महान अंतरिक्ष वैज्ञानिक सहा भारत सरकार की पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम के जन्मदिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आज ही के दिन 15 अक्टूबर 1931 को विश्व के महान अंतरिक्ष वैज्ञानिक सह भारत सरकार के पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म हुआ था ,उनका सारा जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित रहा, स्वर्गीय डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम भारत के 11वें राष्ट्रपति (2002-2007) थे। एक राजनीतिज्ञ होने के साथ ही एक वैज्ञानिक एवं शिक्षक थे। उन्होंने 1998 में पोखरण-द्वितीय परमाणु परीक्षणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उन्होंने ‘भारत का मिसाइल मैन’ का खिताब अर्जित किया। 27 जुलाई 2015 को, आईआईएम शिलांग के छात्रों को व्याख्यान देते समय हृदय गति रुकने से उनकी मृत्यु हो गई, इस अवसर पर डॉ एजाज अहमद, डॉ सुरेश कुमार अग्रवाल, डॉ शाहनवाज अली, अमित कुमार लोहिया, अमजद अली, अजहर सिराज एवं पश्चिम चंपारण कला मंच की संयोजक शाहीन परवीन ने कहा कि स्वर्गीय डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का कहना था कि”अगर लोग मुझे एक अच्छे शिक्षक के रूप में याद करते हैं, तो यह मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान होगा।”
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की अध्यापन में भूमिका एवं उनके समर्पण को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। उन्होंने हमेशा खुद को एक शिक्षक के रूप में पहचाना। शिलांग आईआईएम कॉलेज में पढ़ाने के दौरान उनकी मृत्यु हुई थी , भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ जाकिर हुसैन एवं स्वर्गीय एपीजे अब्दुल कलाम ऐसी शख्सियत हैं जिनकी मृत्यु राष्ट्र सेवा के दौरान हुई । इससे उनके अध्यापन के प्रति समर्पण का पता चलता है। 2006 में, शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार की प्रस्तुति में राष्ट्रपति के अभिभाषण में, उन्होंने कहा कि “शिक्षकों को यह महसूस करना होगा कि वे समाज के निर्माता हैं। एक अच्छे समाज का निर्माण तब किया जा सकता है जब छात्रों के पास ज्ञान हो और वे अपने विषय कार्य में कुशल हों। उन्हें छात्रों को जीवन के लिए एक दृष्टि प्रदान करना है एवं मूल्यों के मूल सिद्धांतों को विकसित करना है जो आने वाले वर्षों में अभ्यास हो “। संयुक्त राष्ट्र संघ ने विश्व के महान वैज्ञानिक सह शिक्षक एपीजे अब्दुल कलाम के सम्मान में प्रत्येक वर्ष उनके जन्मदिन के अवसर पर 15 अक्टूबर को विश्व छात्र दिवस के रूप में मनाने की मान्यता दी,
डॉ ए पी जे अब्दुल कलामी द्वारा लिखित सभी 25 पुस्तकों लिखी नई पीढ़ी के छात्रों के लिए जीवन दर्शन है,
उनका जन्म 15 अक्टूबर, 1931 को धनुषकोडी, रामेश्वरम, तमिलनाडु, भारत में हुआ था। उनका पूरा नाम अवुल पकिर जैनुलाबदीन अब्दुल कलाम था। 2002 में, उन्हें भारत के राष्ट्रपति के रूप में चुना गया था, और राष्ट्रपति बनने से पहले वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के साथ एक एयरोस्पेस इंजीनियर के रूप में काम कर रहे थे।
एक वैज्ञानिक के रूप में, उन्होंने रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान में अपना करियर शुरू किया। इसके अलावा, उन्होंने इसरो में भारत के पहले सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SLV-III) के परियोजना निदेशक के रूप में भी काम किया था।
पोखरण परीक्षण में उनकी अहम भूमिका के बाद डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने 2005 में स्विट्जरलैंड का दौरा किया था जिसके बाद देश ने उनकी यात्रा को सम्मान और सम्मान देने के लिए 26 मई को ‘विज्ञान दिवस’ के रूप में घोषित किया।
उन्हें पद्म भूषण, पद्म विभूषण, भारत रत्न, वीर सावरकर पुरस्कार, रामानुजन पुरस्कार आदि सहित कई पुरस्कार मिले थे। उत्तर प्रदेश जैसे विभिन्न शैक्षणिक, वैज्ञानिक संस्थानों और कुछ स्थानों का नाम डॉ अब्दुल कलाम के सम्मान में रखा गया है। तकनीकी विश्वविद्यालय (UPTU) का नाम बदलकर “APJ अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय” कर दिया गया, केरल प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का नाम बदलकर APJ कर दिया गया अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय”,
निस्संदेह विश्व के महान अंतरिक्ष वैज्ञानिक सह भारत सरकार के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने महात्मा गांधी के सपनों को साकार करते हुए भारत समेत विश्व के छात्रों के लिए एक मार्गदर्शक के रुप में अपनी भूमिका निभाई, इस अवसर पर वक्ताओं ने नई पीढ़ी के छात्र छात्राओं से आह्वान करते हुए कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी एवं अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में छात्र-छात्राएं आगे आए ताकि महात्मा गांधी एवं विश्व के महान अंतरिक्ष वैज्ञानिक एपीजे अब्दुल कलाम के सपनों को साकार किया जाए जिसका सपना बरसों पहले महात्मा गांधी, एपीजे अब्दुल कलाम एवं हमारे पुरखों ने देखा था,




