:- रवि शंकर अमित!
बिहार में पिछड़े वर्गों के सामाजिक न्याय को लेकर आयोग की जनसुनवाई
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष श्री हंसराज गंगाराम अहीर की अध्यक्षता में पटना के स्टेट गेस्ट हाउस में बिहार राज्य की विभिन्न जातियों को अन्य पिछड़ा वर्ग की केंद्रीय सूची में शामिल करने संबंधी जनसुनवाई आयोजित की गई।
आज की जनसुनवाई में आयोग के माननीय सदस्य श्री भुवन भूषण कमल भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर बिहार राज्य की बाथम वैश्य, वियाहुत कलवार, छिपी, दोनवार, गोसाई, लक्ष्मी नारायण गोला, सैंथवार, मोदक मायरा, सामरी वैश्य, सूत्रधार, गोढ़ी (छाबी), परथा और सुरजापुरी मुस्लिम सहित कुल 18 जातियों/उपजातियों को केंद्रीय सूची में शामिल किए जाने के प्रस्ताव पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
विभिन्न समुदायों के जनप्रतिनिधियों ने आयोग के समक्ष अपनी बात रखी और इन जातियों को केंद्रीय सूची में शामिल किए जाने का पुरजोर समर्थन किया।
यह आयोग और बिहार सरकार के बीच आयोजित चौथी महत्वपूर्ण बैठक रही, जिसमें राज्य सरकार के प्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की।
आयोग के अध्यक्ष श्री हंसराज गंगाराम अहीर ने बिहार सरकार के अधिकारियों से इन जातियों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक पिछड़ेपन के समसामयिक आंकड़े प्रस्तुत करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने यह निर्णय लिया है कि आगामी नवंबर महीने के प्रथम सप्ताह में इन जातियों के संबंध में अगली जनसुनवाई आयोजित की जाएगी।
भारतीय जनता पार्टी का मानना है कि समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अवसर मिलना चाहिए। केंद्र सरकार ने हमेशा पिछड़े वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए हैं। आयोग की यह पहल प्रधानमंत्री मोदी जी की “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” की भावना को और सशक्त करेगी।




