फ़िलिस्तीन के प्रति भारत का निरंतर, स्पष्ट और दीर्घकालिक रुख!

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:- रवि शंकर अमित!

दीर्घकालिक प्रतिबद्धता: द्वि-राष्‍ट्र समाधान
फ़िलिस्तीन के प्रति भारत की नीति दीर्घकालिक है और इसे सभी दलों का समर्थन प्राप्त है। भारत ने हमेशा से बातचीत पर आधारित द्वि-राष्‍ट्र समाधान का समर्थन किया है, जिसके तहत एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य फ़िलिस्तीन राष्‍ट्र की स्थापना की हो, जो सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर, इज़राइल के साथ शांतिपूर्ण, सह-‍अस्तित्‍व में रहे।
भारत 1974 में पीएलओ को फिलिस्तीनी जनता के एकमात्र और वैध प्रतिनिधि के रूप में मान्यता देने वाले शुरुआती गैर-अरब देशों में से एक था और 1988 में फिलिस्तीन राष्‍ट्र को मान्यता देने वाले पहले देशों में से एक था।
हम द्वि-राष्‍ट्र समाधान पर उच्च स्तरीय सम्मेलन का हिस्सा थे, और हाल ही में 12 सितंबर 2025 को भारत ने न्यूयॉर्क घोषणा पत्र के पक्ष में मतदान किया, जो फिलिस्तीन के मसले के शांतिपूर्ण हल और द्वि-राष्‍ट्र समाधान के कार्यान्वयन पर सऊदी अरब और फ्रांस की सह-अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय सम्मेलन का परिणाम दस्तावेज है।
7 अक्टूबर, 2023 के बाद से भारत का निरंतर शांति के लिए आह्वान: आतंकवाद की निंदा, मानवीय सहायता की वकालत
वर्तमान संघर्ष में, भारत ने 7 अक्टूबर 2023 को इज़राइल पर हमास के आतंकवादी हमलों और इज़राइल-हमास संघर्ष में हुई नागरिकों की मौतों की कड़ी निंदा की है। भारत सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंतित बना हुआ है और उसने संघर्षविराम, सभी बंधकों की रिहाई और बातचीत एवं कूटनीति के माध्यम से संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान का आह्वान किया है। साथ ही, भारत ने फ़िलिस्तीनी जनता को मानवीय सहायता की सुरक्षित, समयबद्ध और निरंतर आपूर्ति की आवश्यकता पर भी बल दिया है। भारत ने यह भी दोहराया है कि इज़राइल और फ़िलिस्तीन को करीब लाने से प्रत्यक्ष शांति वार्ता की शीघ्र बहाली के लिए परिस्थितियाँ बनाने में मदद मिलेगी।
क्या संयुक्त राष्ट्र में भारत के मतदान के पैटर्न में बदलाव आया है?
बिल्कुल नहीं। फ़िलिस्तीन के प्रति भारत का दीर्घकालिक रुख स्पष्ट और निरंतर रहा है। इसकी झलक संयुक्त राष्ट्र में उसके मतदान पैटर्न में भी मिलती है। दरअसल, भारत ने पिछले 10 वर्षों में संयुक्त राष्ट्र में इज़राइल-फ़िलिस्तीन मुद्दे पर 175 प्रस्तावों में से किसी के भी ख़िलाफ़ मतदान नहीं किया है।
अवधि
प्रस्तावों की संख्या
हाँ
बिना मतदान के स्वीकृत
मतदान में भाग नहीं लिया
ना
मई 2014 के बाद से
175
164
1
10
0
मई 2019 के बाद से
77
66
1
10
0
7 अक्टूबर 2025 के बाद से
28
22
1
5
0

फ़िलिस्तीनी जनता के लिए भारत की प्रतिबद्धता: द्विपक्षीय और संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से निरंतर विकास सहायता
भारत फ़िलिस्तीनी जनता को द्विपक्षीय रूप से और निकट पूर्व में फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) के माध्यम से मानवीय सहायता प्रदान करता है। हम यूएनआरडब्ल्यूए को 5 मिलियन डॉलर का सालाना योगदान देते हैं।
2014 से फ़िलिस्तीन को दी गई भारत की विकास सहायता (लगभग 80 मिलियन डॉलर) पिछले 65 वर्षों में दी गई सहायता (लगभग 42 मिलियन डॉलर) से लगभग दोगुनी है और 40 मिलियन डॉलर मूल्य की परियोजनाएँ कार्यान्‍वयन की प्रक्रिया में हैं।
फ़िलिस्तीनियों का दृष्टिकोण क्या है? फ़िलिस्तीनी जनता के प्रति भारत के समर्थन के बारे में फ़िलिस्तीनी राजदूत का कथन :
मौजूदा प्रधानमंत्री महामहिम नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व में भारत फ़िलिस्तीनी जनता के लिए उत्‍कृष्‍ट कार्य कर रहा है। भारत इस समय एक से ज़्यादा परियोजनाओं का निर्माण कर रहा है, जिनमें से एक मिलियन डॉलर की परियोजना है, जो एक अस्पताल है। मौजूदा प्रधानमंत्री की सरपरस्‍ती में भारत, फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों से संबंधित संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूएनआरडब्ल्यूए का भी समर्थन कर रहा है।
हम पूरी तरह संतुष्ट हैं, और यदि हमें लगता है कि हमें किसी मुद्दे पर भारत सरकार के साथ चर्चा करने की जरूरत है, तो मैं आप सभी को आश्वस्त कर सकता हूँ कि भारतीय विदेश मंत्रालय का दरवाजा फिलिस्तीनियों के रूप में हमारे लिए 24 घंटे खुला है। हम फिलिस्तीन और भारत से संबंधित मामलों पर भारत सरकार के साथ पूरी पारदर्शिता के साथ चर्चा करते रहे हैं।
मैं यह नहीं कहूँगा कि इसमें कोई बदलाव है… हम भारत-फिलिस्तीनी संबंधों को व्यापक स्तर पर… यूएनजीए में, यूएनएचआरसी में, और फिलिस्तीन में कार्यान्वित परियोजनाओं में मापते थे । लेकिन, हम किसी अन्य देश के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों में हस्तक्षेप नहीं कर सकते।
प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धताएँ : शांति के लिए दोनों पक्षों के साथ मित्रता का लाभ उठाना
प्रधानमंत्री के इज़राइल और फ़िलिस्तीन, दोनों के नेताओं के साथ बेहतरीन संबंध हैं। दरअसल, जब प्रधानमंत्री श्री मोदी ने फरवरी 2018 में फ़िलिस्तीन का दौरा किया, तो वह फ़िलिस्तीन की राजकीय यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। इसके अलावा, भारत और फ़िलिस्तीन के बीच संबंधों को बढ़ावा देने में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने उन्हें ‘ग्रैंड कॉलर ऑफ़ द स्टेट ऑफ़ फ़िलिस्तीन’ सम्मान से सम्मानित किया।
इज़राइली वित्त मंत्री की यात्रा: छह साल की बातचीत प्रक्रिया का समापन
वित्त मंत्री की यह यात्रा इज़राइली वित्त मंत्रालय के प्रमुख के रूप में एक द्विपक्षीय निवेश समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए की गई थी। इस पर छह साल से अधिक समय से बातचीत चल रही थी और समझौते के मसौदे को पिछले महीने अंतिम रूप दिया गया। उन्होंने भारत-इज़राइल द्विपक्षीय आर्थिक और वित्तीय संबंधों को बढ़ाने के लिए भारत की यात्रा की।

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