पंकज कुमार ठाकुर

फिजा में वीर रस घोल रहा है, भोंपू!
चुनावी मैदान के अखाड़े में, जाता जमात, विकास यात्रा, या तत्कालिक आमदनी के द्वंद में वोटर!
( हम तो बोलेंगे हुजूर)
पंचायत चुनाव में अचानक नेता जी को फिर से देश प्रेम याद आ गया, हम लाए हैं तूफान से किश्ती निकाल कर, मेरे देश की धरती, गांव गांव देश भक्ति से लबरेज है तो सुबह होते ही देश भक्ति के गाने, भोपू अपना काम कर रहा है तो देश प्रेम जगाते हुए वोट की अपील, फिर दिमाग में आया पंचायत चुनाव है ,यह प्रचार गाड़ी है! अगले ही पल एक नेता जी देश भक्ति से लवरेज होते हुए ऑटो पर, लेकिन जेहन में अभी तक एक बात कौंध रही है, चुनाव के वक्त ही नेताओं को अचानक देशभक्ति कैसे याद आ जाता है! क्या इस बार चुनाव देश प्रेम भावना पर हो रहा है, हालांकि देश भक्ति और नेता जी को वोट देने की लाइनों से वीर रस का भाव खोलने वाला भोपू प्रचार किसी एक प्रत्याशी का नहीं बल्कि सभी का है! बाकी नेता जी चुनाव जीतने के लिए हर करम कर रहे हैं, जगह-जगह भंडारा अंग वस्त्र के साथ दक्षिणा का आयोजन, हालांकि यह बड़े गुपचुप तरीके से हर गांव में है! वीर रस भरा भोपू पर प्रचार मात्र इसका एक करम है! ताकि माहौल बना रहे जबकि चुनाव मैदान के अखाड़े में जात जमात विकास या तत्कालिक आमदनी के द्वंद में वोटर भी उलझ गए हैं!
नेताजी तो यहां तक समझा रहे हैं कि जीतने के बाद वह सभी को सरकारी योजनाओं के अलावे कई योजनाएं अपनी तरफ से देंगे, हालांकि इस बार हर बार की तरह पार्टी के आधार पर लड़ा जा रहा है पंचायत चुनाव इस बार भी प्रत्याशियों की संख्या ताबड़तोड़ है कुछ वोट कटवा भी रोल अहम है! अभी फिलहाल कोई हार नहीं रहा है सभी के जीत के दावे हैं ऐसे प्रत्याशी देशभक्ति गीत गीतों से खुद को संबल बनाने में लगे हैं!




