रिपोर्ट अनमोल कुमार
- 18 जनवरी 1969 को 93 वर्ष की आयु में अव्यक्त हुए थे ब्रह्मा बाबा
- ब्रह्मा बाबा की 56 वीं पुण्य तिथि आज
- विश्वभर में विश्व शांति दिवस के रूप में मनाई गई सूपौल। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय सिमराही राघोपुर के तत्वाधान में स्थानीय ओम शांति भवन के सभागार में शनिवार को ब्रह्माकुमारीज संस्थान के साकार संस्थापक पिता श्री प्रजापिता ब्रह्मा बाबा का 56 वा पुण्य स्मृति दिवस विश्व शान्ति दिवस के रूपमें मनाया। उक्त कार्यक्रम का शुभारम्भ स्थानीय सेवा केंद्र प्रभारी राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी बबिता दीदी, उप मुख्य पार्षद विनीता देवी,समाजसेवी भूपेंद्र नायक यादव, धर्म प्रेमी अवध मेहता ,मंजू पंसारी, प्रो बैद्यनाथ भारत, अरूण जायसवाल,सौरभ कुमार, शांति देवी ब्रह्माकुमारी बिना वहन, इन्द्रदेव चौधरी, पप्पू सिंह,ब्रह्माकुमार किशोर भाईजी इत्यादियो ने संगठित रूपमें फूलमाला द्वारा श्रद्धा सुमन अर्पित करके और दीप करके शुभारंभ किया।
ब्रह्मकुमारीज संस्थान के सिमराही राघोपुर सेवा केंद्र प्रभारी राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी बबिता दीदी जी ने कहा कि नारी शक्ति का विश्व का सबसे बड़ा और विशाल संगठन की नींव रखने वाले ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के संस्थापक ब्रह्मा बाबा की 18 जनवरी को 56वीं पुण्य तिथि मना रहे है। बाबा की याद में 1 जनवरी से सभी सेवा केंद्र में विशेष योग-तपस्या जारी है। जो मौन योग साधना से बाबा के तस्वीर और शांतिस्तंभ पर पुष्पांजली अर्पित किया गया।
उन्होंने कहा कि 18 जनवरी 1969 को 93 वर्ष की आयु में ब्रह्माकुमारीज़ के साकार संस्थापक पिताश्री ब्रह्मा बाबा ने संपूर्णता की स्थिति प्राप्त कर अव्यक्त हो गए थे। उनके अव्यक्त होने के बाद संस्थान की बागडोर पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि ने संभाली। बाबा की त्याग-तपस्या का परिणाम है कि खुद पीछे रहकर नारी शक्ति को आगे बढ़ाया और आज पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति अध्यात्म का परचम फहर रहा है।
राजयोगिनी बबीता दीदी जी ने कहा कि हम ब्रह्माकुमारी बहनों ने आज समाज में श्रेष्ठ चरित्र निर्माण की अलख जगाने की मुहिम चला रखी है। जो विकृतियां मानव मन में प्रवेश कर चुकी हैं, उनको निकालना बहुत बड़ी चुनौती है, परंतु इन शक्ति स्वरूपा बहनों पर मुझे पूरा विश्वास है कि ये भारतवर्ष को पुनः स्वर्णिम भारत बनाकर रहेंगी।
मुख्य अतिथि के तौर पर समाजसेबी भूपेन्द्र प्रसाद यादव जी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि वर्तमान समय में व्यक्ति निर्माण की कोई फैक्ट्री है तो प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय है । आज समाज में हर कोई अधिकार लेना चाहता है लेकिन कर्तव्य निष्ठा की कमी लगभग हर जगह दिखाई देती है। ब्रह्माकुमारीज की शिक्षाएं मनुष्य को कर्तव्यनिष्ठ और चरित्रवान बनाती हैं ऐसा मेरा व्यक्तिगत अनुभव है। उन्होंने सभी नर और नारी को भी ब्रह्माकुमारी की शिक्षाओं से लाभ लेने को कहा।
उन्होंने सभी को साधुवाद देते हुए कहा की ब्रह्माकुमारीज मुझे अपने परिवार जैसा अनुभव होता है और मेरा सारा परिवार यहां की शिक्षाओं से लाभ लेता रहा है।
डा बीरेंद्र प्रसाद साह जी ने कहा सनातन धर्म वह धर्म है जो संसार में सहिष्णुता का स्त्रोत है। संसार के लगभग हर धर्म को मानने वाले लोग भारत भूमि पर निःसंकोच अपनी धार्मिक स्वतंत्रता के साथ रहते हैं। यह ईश्वरीय ज्ञान भी इस बात का प्रतीक है, जहां गंगा यमुना और अदृश्य सरस्वती आकर आपस में मिलकर एक हो जाती हैं।
उक्त कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमार किशोर भाईजी ने किया। सैकड़ो श्रृद्धांजलिओं ने तस्वीर पर पुष्प अर्पित करके श्रद्धांजलि दिए।अंत में प्रसाद ग्रहण कर ब्रह्मा भोजन ग्रहण कराया गया ।




