विश्व शांति स्तूप के इतिहास में पहली बार मीडिया कवरेज पर लगाया गया रोक,मंत्री का पत्रकारों ने किया बहिष्कार!

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रिपोर्ट- आशीष कुमार

जनता के करोड़ों की लागत से बने भवन का उद्घाटन में मीडिया को किया गया दरकिनार

मंत्री की प्रेस वार्ता का पत्रकारों ने किया बहिष्कार

नालंदा : जिला प्रशासन द्वारा मीडियाकर्मियों की आवाजाही पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों से पत्रकार समुदाय में आक्रोश की लहर है। गुरुवार को विश्व शांति स्तूप के वार्षिकोत्सव समारोह एवं रोप-वे के निकट नवनिर्मित एकीकृत भवन के उद्घाटन कार्यक्रम में मीडियाकर्मियों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम से मीडिया को दूर रखने का यह फैसला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार माना जा रहा है। विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि विश्व शांति स्तूप के इतिहास में यह पहला अवसर है जब वार्षिकोत्सव समारोह में मीडिया कवरेज पर प्रतिबंध लगाया गया है। स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि जिला प्रशासन पिछले कुछ समय से विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों में मीडिया की उपस्थिति को लेकर नए-नए नियम लागू कर रहा है, जो प्रेस की स्वतंत्रता के मूल सिद्धांतों के विपरीत है। करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित एकीकृत भवन जनता के धन से बना है, जिसकी जानकारी आम नागरिकों तक पहुंचाना मीडिया का दायित्व है। विश्व शांति स्तूप, जो शांति और अहिंसा का वैश्विक प्रतीक है, का संदेश अब तक मीडिया के माध्यम से ही विश्व भर में प्रसारित होता रहा है। कई देशों ने इस संदेश को आत्मसात भी किया है। प्रशासन का यह रवैया न केवल पत्रकारिता के मूल्यों के विरुद्ध है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को भी कमजोर करता है।

नालंदा में अब पत्रकारों को जिला प्रशासन के कार्यक्रम में भाग लेने के लिए कुर्ता-पायजामा और हाथ में झंडा लेना होगा

जिला प्रशासन द्वारा मीडियाकर्मियों पर लगाए जा रहे नए-नए प्रतिबंधों ने पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब ऐसा लगने लगा है कि सरकारी कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए पत्रकारों को कुर्ता-पायजामा पहनना होगा, माइक की जगह हाथों में पार्टी झंडा थामना होगा। यह विडंबना ही कही जाएगी कि जहां सफेदपोश नेताओं का बेरोकटोक आना-जाना जारी है, वहीं मीडियाकर्मियों की सघन जांच की जा रही है।

प्रशासनिक जवाबदेही से बचने का प्रयास

जब मीडियाकर्मियों ने इन प्रतिबंधों का कारण जिला सूचना पदाधिकारी गुप्तेश्वर कुमार से पूछा, तो उन्होंने कार्यक्रम को ट्रस्ट का बताकर जिला प्रशासन की जवाबदेही से बचने का प्रयास किया। यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि प्रशासन मीडिया को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न बहानों का सहारा ले रहा है।

बार-बार प्रतिबंधों का इतिहास

यह पहला मौका नहीं है जब मीडियाकर्मियों पर इस तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं। पूर्व में भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कई कार्यक्रमों, विशेषकर नालंदा खेल विश्वविद्यालय के उद्घाटन समारोह में भी, मीडिया की पहुंच को सीमित किया गया था।

दोहरे मापदंड की नीति

विशेष रूप से चिंताजनक यह है कि जहां सफेदपोश नेताओं का आना-जाना बिना किसी जांच-पड़ताल के होता है, वहीं मीडियाकर्मियों को कड़ी जांच से गुजरना पड़ता है, मानो वे कोई संभावित अपराधी हों। यह दोहरा मापदंड प्रशासन की पक्षपातपूर्ण कार्यशैली को उजागर करता है।

पत्रकारों का विरोध : मंत्री प्रेम कुमार के प्रेस वार्ता का किया बहिष्कार

इस स्थिति का विरोध करते हुए पत्रकारों ने पर्यावरण व सहकारिता मंत्री प्रेम कुमार की प्रेस वार्ता का बहिष्कार किया। जिला अतिथि गृह में आयोजित इस प्रेस वार्ता में मंत्री के एक घंटे की देरी से पहुंचने पर पत्रकारों ने जिला प्रशासन के रवैये पर अपना विरोध दर्ज कराते हुए कार्यक्रम छोड़ दिया। मंत्री प्रेम कुमार ने औपचारिकता निभाते हुए डीएम और जिला वन अधिकारी से पत्रकारों की समस्याओं पर चर्चा की, लेकिन अंततः डीएम को बिना मीडिया के कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित करने पर बधाई देकर प्रशासन की मंशा स्पष्ट कर दी।

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