अपने पूर्ण स्वरूप को पाने के लिए 21 वर्षों से तरस रहा एनएच106 उदाकिशुनगंज – बीरपुर पथ

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मानस चंद्र सेतु की रिपोर्ट :-

उदाकिशुनगंज , मधेपुरा से उमेश शाह की रिपोर्ट

कोसी क्षेत्र की महत्वपूर्ण सड़क एनएच 106 के पहले चरण वीरपुर से उदाकिशुनगंज के निर्माण में लगा ग्रहण है कि हटने का नाम ही नहीं ले रहा है। राष्ट्रीय उच्च पथ का दर्जा प्राप्त होने के बाद से ही इस पथ का निर्माण कार्य दशकों तक निविदा से संबंधित विभागीय जटिलताओं में उलझा रहा। ऐसा लगने लगा कि शायद यह सड़क अब कभी नहीं बन पाए । विगत 7 वर्ष पहले शुरू हुए उदाकिशुनगंज बीरपुर पथ के निर्माण कार्य का हाल यह है कि खत्म ही नहीं हो रहा है। इसके बाद स्वीकृत की गई दो तीन परियोजनाएं उदाकिशुनगंज से बीरपुर भाया मीरगंज, कुमारखंड, जदिया, छातापुर तथा उदाकिशुनगंज से नवगछिया भाया चौसा ,भटगामा राजकीय उच्च पथ का निर्माण कार्य शुरू होकर पूर्ण भी हो चुका है। यहां तक कि इसी  एनएच106 के शेष भाग उदाकिशुनगंज से फुलौत होते हुए थाना बिहपुर तक का कार्य तेज गति से चल रहा है और प्रतीत होता है कि वह स समय पूर्ण भी हो जाएगा। कार्य करा रही एजेंसी आई एफ एंड एल एस के कार्यकलापों को देखकर लगता है कि  इस वर्ष भी निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सकेगा। कार्य  की प्रगति इतनी धीमी है कि पिछले 7 वर्षों से जिला मुख्यालय मधेपुरा जाने वाले छह प्रखंड चौसा, पुरैनी आलमनगर, उदाकिशुनगंज, बिहारीगंज, ग्वालपाड़ा के निवासी, जिनका इसी सड़क से चलना मजबूरी है और लगातार पिछले छह 7 वर्षों से इस सड़क पर सफर करने के दौरान पथ में गाड़ियों के परिचालन तथा निर्माण संबंधी गतिविधियों से उठने वाले धूल और धुएं के गुबार के कारण कई गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हो चुके हैं जिनकी सुध  लेने वाला कोई नहीं है । निर्माण एजेंसी तथा राष्ट्रीय उच्च प्राधिकरण की बेपरवाही का आलम यह है की माननीय उच्च न्यायालय की फटकार भी बेअसर रही। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की बात करें तो ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे उन्हें इस सड़क के निर्माण कार्य से कोई सरोकार ही नहीं है। सिर्फ ग्रामीण सड़क बनवाना ही उनकी जिम्मेवारी है। अभी हाल ही में रेफरल अस्पताल उदाकिशुनगंज के सभी तरह के कार्यों को पीएचसी उदाकिशुनगंज से N.H.106 पर पटेल चौक से 2 किलोमीटर की दूरी पर हरेली में अवस्थित इसके वास्तविक भवन में स्थानांतरित कर दिया गया साथ ही उदाकिशुनगंज पीएचसी में मिल रहे सभी तरह की सुविधाओं को रेफरल अस्पताल के मूल भवन में स्थानांतरित कर दिया गया। सभी रोगियों और उनके अभिभावकों को रेफरल अस्पताल तक जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अगर बारिश हुई हो तो हमेशा दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है। लोग जान जोखिम में डालकर अस्पताल पहुंच पाते हैं। अगर स्थानीय प्रतिनिधि या जिला प्रशासन एनएच डिविजन को निर्देशित करें तो पटेल चौक उदाकिशुनगंज से रेफरल अस्पताल हरेली तक 2 किलोमीटर सड़क के निर्माण को प्राथमिकता देकर जल्द से जल्द पूरा किया जा सकता है ताकि रोगियों को अस्पताल तक सुरक्षित ले जाया जा सके बदहाल सड़क के कारण रेफरल अस्पताल के अस्तित्व पर भी प्रश्न चिन्ह लग रहा है।

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