हमार मोकामा: बदहाल मोकामा!

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रिपोर्ट-अनमोल कुमार :-

सारे उद्योग एक-एक कर हो गए बंद
बिहार का मिनी कोलकाता कहा जाने वाला मोकामा 80 के दशक तक उद्योग, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन का प्रमुख केंद्र रहा। फिर यहां बाहुबलियों की अदावत शुरू हुई और मिनी कोलकाता में एके-47 जैसे हथियार तड़तड़ाने लगे। तब से मोकामा की पहचान ही बदल गई।

30 साल के बाहुबली राज में बंद हो गए सारे उद्योग

1990 से लगातार मोकामा का प्रतिनिधित्व बाहुबलियों के हाथ में है। इन तीस सालों में मोकामा में न तो कोई उद्योग धंधा लगा और न ही बाजार का विस्तार हुआ। आजादी के समय स्थापित बाटा, भारत वैगन, मैकडॉवेल, सूत मिल जैसे सारे उद्योग बंद हो गए। कभी इन उद्योगों में 6000 कर्मचारी थे हरा भरा मोकामा पतझड़ के बजाय सुख गया

मोकामा क्षेत्र के लोगो को जरायण दुनिया का दाग से आज भी अपमानित होना ही परता है

दानापुर, पटना, फतुहा, बख्तियार पुर के लोग आज भी मोकामा क्षेत्र में बेटी ,बेटा को शादी नहीं करना चाहते हैं क्या ये दाग वंशा नुगत चलती रहेगी या बदलेगी

नेताओ का धन उगाही का केंद्र बना मोकामा

वहीं, 1.06 लाख हेक्टेयर में फैले मोकामा टाल को दोफसला बनाने का सपना आज तक पूरा नहीं हुआ। टाल के किसानों का दर्द ज्यों का त्यों है। लोगो आज भी आने जाने के लिए रास्ता सही से नहीं बन पाया लोगो आज भी शिक्षा, स्वास्थ, रोजगार ललायत है

नाजरथ अस्पताल आजादी के बाद से पूर्वी बिहार का प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र था, लेकिन एक दशक पहले इसे बंद कर दिया गया चालू प्रयास कितना रंग लाती है देखने को है

शेखपुरा जिला, लखीसराय जिला, अरवल जिला मोकामा के सामने क्या खासियत फिर भी जिला बना

भगवान मोकामा के लोगों को उज्वल भविष्य के लिए कृपा करे
मोकामा जिला बनाने में सहयोग करें । मोकामा जिला बनाओ संघर्ष समिति के विजय कुमार यादव ने मोकामा की दुर्दशा पर चिंता जाहिर करते हुए राज्य एवं केंद्र सरकार से औद्योगिक हब बनाने की मांग की है ।

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