रिपोर्ट – अनमोल कुमार
पटना. तंबाकू सेवन, सभ्यता के बचाव के लिए जरूरी है तंबाकू निषेध- यह बात डा राणा एस पी सिंह वरिष्ठ फिजीशियन,ने बोरिंग केनाल रोड, पंचमुखी हनुमान मंदिर, राम उग्रह मार्केट के पास स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम में कहा।
विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा तंबाकू निषेध दिवस प्रतिवर्ष 31 मई को मनाया जाता है, जिससे कि पूरे विश्व का तंबाकू द्वारा फैलाई गई महामारियों की ओर ध्यान आकर्षित कर सके। इसकी शुरुआत सन् 1987 से हुई थी। इस वर्ष तंबाकू निषेध दिवस का ध्येय वाक्य ‘पर्यावरण का संरक्षण’ है, जिसका उद्देश्य है कि तंबाकू के निषेध से पर्यावरण को कैसे बचाया जाए। आंकड़े बताते हैं कि प्रतिवर्ष साठ करोड़ वृक्षों को काटकर सिगरेट बनाया जाता है और तंबाकू जनित उत्पादों से आठ करोड़ चालीस लाख टन कार्बन डाईआक्साइड उत्सर्जित होती है जिससे वायुमंडल का तापमान बढ़ता है। इतना ही नहीं सिगरेट बनाने में लगभग बाईस अरब लीटर पानी का उपयोग किया जाता है।
तंबाकू सेवन से हर साल 80 लाख से ज्यादा लोगों की अकाल मौत होती है। इनमें से 7 मिलियन से अधिक प्रत्यक्ष तंबाकू के उपयोग करने के कारण मृत्यु को प्राप्त होते हैं, जबकि लगभग एक लाख से अधिक अप्रत्यक्ष धूम्रपान करने से मारे जाते हैं। विश्व में करीब 2.5 करोड़ कैंसर के मरीज हैं और 2025 तक 3.0 करोड़ होने की सम्भावना है। भारत तंबाकू का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है तथा 17 लाख लोगों की तंबाकू सेवन से मृत्यु होती है।
इस बार ‘विश्व तंबाकू निषेध दिवस’ की थीम है– ‘पर्यावरण की रक्षा करें’. बता दें कि पिछले साल इस दिवस की थीम “कमिट टू क्विट” थी.
शरीर के किस हिस्से को कितना कर सकता है प्रभावित, कौन-कौन सी बीमारियां संभव डॉ. राणा एस पी सिंह वरिष्ठ फिजीशियन कहते हैं कि सिगरेट या तंबाकू में निकोटीन नाम का एक पदार्थ पाया जाता है जो बेहद खतरनाक हो सकता है. कोरोना काल में तंबाकू का सेवन आपको मौत के कगार पर ला सकता है. इससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. जहां कोरोना के दौरान फेफड़ों में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाने से लोगों की जान जा रही है. ऐसे में धूम्रपान करने वाले लोगों में कोविड होने से तुरंत गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है. वे बताते हैं कि शरीर में तंबाकू निम्नलिखित अंगों को प्रभावित कर सकता है…
दरअसल, मस्तिष्क में जहरीला पदार्थ निकोटीन जब पहुंचता है तो हमें बेचैनी, चिड़चिड़पन आदि महसूस हो सकता है.
इससे दिल की बीमारी का खतरा चार गुना अधिक बढ़ जाता है.
तंबाकू फेफड़ों में एक परत बैठा सकता है जिससे महत्वपूर्ण गैस एक्सचेंज होने में दिक्कत होने लगती है. परिणाम स्वरूप ऑक्सीजन की कमी हो सकती है.
इससे लंग्स व मुंह के कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है.
इससे शरीर में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है जिससे डायबिटीज जैसी बीमारी भी संभव है.
इसके धुएं में आर्सेनिक, फार्मलाडिहाइड और अमोनिया जैसे हानिकारक रसासन पाए जाते है.
जो ब्लड में मिश्रण होकर हमारी आंखों के नाजुक ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकते है जिससे रोशनी तक जा सकती है.
पुरुष या महिलाओं जो धूम्रपान का सेवन करते है उनमें डिमेंशिया या अल्जाइमर जैसे रोग हो सकते है. जिससे आपकी याददाशत तक जा सकती है.
इससे महिलाओं की प्रजनन क्षमता भी प्रभावित होती है.
यह दिल की धड़कन के साथ-साथ ब्लड प्रेशर को भी बढ़ा सकता है.
तंबाकू के सेवन से लकवा, गठिया, फेफड़े का रोग समेत अन्य समस्याएं हो सकती है.




