छात्र-युवा आक्रोश दिवस के समर्थन में भाकपा-माले का विशाल प्रतिवाद मार्च!

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रिपोर्टर– राजीव कुमार झा

जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण छात्र-युवा मार्च पर लाठीचार्ज की निंदा, एनटीए भंग करने एवं शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

– मधुबनी, दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रही अनिश्चितकालीन भूख-हड़ताल के समर्थन में, पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के विरोध में तथा आइसा केन्द्रीय अध्यक्ष नेहा, मनीष और आमीन के साथ एकजुटता प्रकट करते हुए, राष्ट्रव्यापी छात्र-युवा आक्रोश दिवस के समर्थन में और जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण छात्र-युवा मार्च पर दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के विरोध में भाकपा-माले जिला कमिटी, मधुबनी के नेतृत्व में विशाल प्रतिवाद मार्च निकाला गया।
जिला सचिव कॉमरेड ध्रुव नारायण कर्ण के नेतृत्व में सैकड़ों छात्र-युवाओं एवं पार्टी कार्यकर्ताओं ने मधुबनी रेलवे स्टेशन परिसर से झंडा-बैनर और जोशीले नारों के साथ मार्च की शुरुआत किया। यह मार्च प्रधान डाकघर, थाना चौक एवं वॉटसन स्कूल होते हुए समाहरणालय के समक्ष पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की शिक्षा, छात्र-युवा एवं लोकतंत्र विरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इसके बाद डॉक्टर भीमराव अंबेडकर स्मारक के समक्ष आयोजित सभा में मार्च का समापन हुआ।
सभा को संबोधित करते हुए भाकपा-माले के जिला सचिव कॉमरेड ध्रुव नारायण कर्ण ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व संकट से गुजर रही है। लगातार हो रहे पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार तथा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की विफलताओं ने करोड़ों छात्र-युवाओं के भविष्य को असुरक्षित बना दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार इन गंभीर समस्याओं का समाधान करने के बजाय अपनी जवाबदेही से बचने और छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे छात्र-युवाओं पर दिल्ली पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अत्यंत चिंताजनक है। छात्र-युवा अपने भविष्य, रोजगार और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग किया जा रहा है। यह केंद्र सरकार के शिक्षा, छात्र-युवा और लोकतंत्र विरोधी रवैये को उजागर करता है।
सभा में वक्ताओं ने मांग किया है कि पेपर लीक की सभी घटनाओं की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को भंग कर पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह परीक्षा व्यवस्था लागू की जाए, पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक सहित आंदोलनरत छात्र-युवा नेताओं के विरुद्ध की गई दमनात्मक कार्रवाइयों को वापस लिया जाए तथा नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तत्काल अपने पद से इस्तीफा दें।
सभा के अंत में छात्र-युवाओं के अधिकारों, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लोकतांत्रिक अधिकारों और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की स्थापना के लिए संघर्ष को और व्यापक तथा तेज करने का संकल्प लिया गया।
मार्च में कॉमरेड श्याम पंडित, भूषण सिंह, उत्तिम पासवान, मयंक कुमार, योगनाथ मंडल,विजय कुमार दास, अजीत ठाकुर नवल किशोर यादव ,पुनेन्दु कुमार, विशंभर कामत, योगेन्द्र यादव ,मदन चंदर झा,प्रेम ठाकुर, महाकांत यादव ,राम बिलास सदाय ,सुनीता सदाय योगेन्द्र महतो सहित जिला कमिटी के अन्य सदस्यों ने भी संबोधित किया। जबकि आक्रोश मार्च में सैकड़ों लोगों ने भाग लिया।

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