आरा – अतिक्रमण पर कार्रवाई नहीं होने से लोगों को भारी परेशानी!

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आरा/आशुतोष पाण्डेय

जिला प्रशासन एक ओर शहर में अतिक्रमण हटाने की लगातार कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर के सबसे महत्वपूर्ण रेलवे ऊपरी पुल के नीचे फैले अतिक्रमण पर अब तक कोई पहल नहीं की गई है। स्थिति यह है कि पुल के नीचे वर्षों से चल रहे खटाल न सिर्फ यातायात में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं, बल्कि पुल की संरचना को भी गंभीर खतरा पहुंचा रहे हैं।

महत्वपूर्ण है पश्चिमी गुमटी का रेलवे ओवरब्रिज

पश्चिमी गुमटी के पास स्थित रेलवे ऊपरी पुल शहर और आसपास के जिलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। प्रतिदिन हजारों वाहनों के साथ बड़ी संख्या में पैदल यात्री भी इस पुल से गुजरते हैं। बक्सर एवं उत्तर प्रदेश की ओर से आने-जाने वाले वाहनों के लिए भी यह पुल प्रमुख मार्ग है।
इसके बावजूद पुल के नीचे वर्षों से संचालित खटाल को हटाने की दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। खटाल संचालकों द्वारा गोबर से गोइठा बनाने के लिए पुल की दीवारों और पिलरों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पुल की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। स्थानीय लोग बताते हैं कि खटाल के कारण सड़क संकरी हो गई है और यातायात में आए दिन जाम की स्थिति बनती है।
बदबू और गंदगी से लोग परेशान
खटालों में पसरा गोबर और गंदगी आसपास के लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण है। आए दिन राहगीरों और खटाल संचालकों के बीच नोकझोंक की स्थिति बनती रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम चुनाव हो या विधानसभा व लोकसभा चुनाव — हर बार नेताओं द्वारा इस समस्या के समाधान का वादा किया जाता है, परंतु चुनाव के बाद सब कुछ जस का तस रह जाता है।
संरचना पर बढ़ रहा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार पुल के पिलरों पर लगातार नमी और गंदगी जमा रहने से उसकी मजबूती पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।

वर्ष 2006 में हुआ था पहुंच पथ का उद्घाटन

पश्चिमी गुमटी के रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण 80 के दशक में किया गया था, जबकि इसके पहुंच पथ का उद्घाटन वर्ष 2006 में किया गया था। तब से इस पुल पर बढ़ते दबाव और नीचे फैले अतिक्रमण को लेकर कई बार शिकायतें भी उठी हैं, लेकिन समाधान अब भी दूर की बात बनी हुई है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन तत्काल प्रभाव से पुल के नीचे से खटाल हटाए और रास्ता पूरी तरह खाली कराए, ताकि यातायात सुचारू रहे और पुल की उम्र भी सुरक्षित रह सके।

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