रिपोर्ट – मिथुन कुमार!
नालंदा :बरसात से पहले जल संरक्षण को लेकर सरकार और जल संसाधन विभाग लगातार बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं। पुल पुलियों की सफाई से लेकर तालाबों और जल संरक्षण स्थलों के जीर्णोद्धार का कार्य तेजी से कराया जा रहा है। इसी कड़ी में तेतरामा पंचायत स्थित दिग्गी पोखर के जीर्णोद्धार के लिए करीब साढ़े चार करोड़ रुपये की योजना पर काम चल रहा है। लेकिन अब इस योजना पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों की योजना में भारी अनियमितता बरती जा रही है और संवेदक मनमाने तरीके से काम करा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक टेंडर की शर्तों के अनुसार पोखर की लगभग 6 फीट तक खुदाई होनी चाहिए, ताकि जल संरक्षण की क्षमता बढ़ सके। लेकिन मौके पर मात्र डेढ़ फीट तक ही खुदाई कर खानापूर्ति की जा रही है। आरोप है कि संवेदक द्वारा मशीनों और ट्रैक्टरों से केवल ऊपर-ऊपर मिट्टी हटाकर कार्य पूरा दिखाने की कोशिश की जा रही है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये की लागत वाली इस योजना में गुणवत्ता का पूरी तरह अभाव है। कहीं ट्रैक्टर से जुताई कर मिट्टी बराबर की जा रही है तो कहीं इधर-उधर से मिट्टी काटकर सिर्फ दिखावटी कार्य किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि अगर इसी तरह लापरवाही बरती गई तो बरसात के बाद भी जल संरक्षण का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाएगा। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो करोड़ों रुपये की यह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगी। अब देखने वाली बात होगी कि विभाग इन आरोपों पर केक्या जांच की कार्रवाई करती है।
मिथुन कुमार, संवाददाता नालंदा




