रिपोर्टर– राजीव कुमार झा!
मधुबनी जिले के बेनीपट्टी
अनुमंडल अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा उपलब्ध नहीं होने को लेकर स्थानीय स्तर पर असंतोष गहराता जा रहा है। इस संबंध में बेनीपट्टी नगर पंचायत वार्ड संख्या 16 निवासी नूर आलम द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) को दिए गए आवेदन ने स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया है।
आवेदन के अनुसार, नूर आलम अपनी पत्नी सबिला खातून, 35 वर्ष, जो लगभग 5 माह की गर्भवती हैं, को 7 अप्रैल को अनुमंडल अस्पताल लेकर पहुंचे थे। चिकित्सक द्वारा ब्लड जांच एवं अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी गई। अस्पताल में ब्लड जांच तो कर दी गई, लेकिन अल्ट्रासाउंड के लिए अगले दिन आने को कहा गया।
जब वे 8 अप्रैल को पुनः अस्पताल पहुंचे, तो वहां मौजूद नर्स एवं सुरक्षा गार्ड ने साफ तौर पर अल्ट्रासाउंड सेवा उपलब्ध नहीं होने की बात कही और बाहर से जांच कराने की सलाह दी। इस घटना ने न केवल पीड़ित परिवार को परेशानी में डाला, बल्कि अस्पताल की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।
नूर आलम ने अपने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पूर्व जनवरी माह में भी उन्हें इसी प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ा था। उन्होंने आरोप लगाया है कि अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध रहने के बावजूद मरीजों को सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिससे उन्हें निजी जांच केंद्रों की ओर मजबूरन रुख करना पड़ता है और बढते आर्थिक बोझ का भाड़ भी झेलना पड़ता है।
इधर, स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन की उपलब्धता सुनिश्चित कराने एवं उसे चालू करवाने के लिए समय-समय पर हर संभव प्रयास किए गए। इसके बावजूद यदि मरीजों को सेवा नहीं मिल रही है, तो यह व्यवस्था की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
एसडीओ को दिए गए आवेदन में जिस प्रकार अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा का लाभ नहीं दिए जाने का आरोप लगाया गया है, वह बहुत कुछ बयान करता है। यह न केवल स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि आम जनता के भरोसे को भी कमजोर करता है।
अब इस पूरे मामले में अनुमंडल प्रशासन की कार्रवाई पर क्षेत्रवासियों की नजर टिकी हुई है। लोगों को उम्मीद है कि शिकायत की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में मरीजों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का विश्वास बहाल हो सके।




