:- न्यूज़ डेस्क!
मंझौल, बेगूसराय।
इस धरा को पापमुक्त तथा दुष्टों का विनाश करने के लिए भगवान ने समय-समय पर अवतार लिया है। यह बात प्रेमाचार्य पीताम्बरजी महाराज ने मंझौल में चल रही नौदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कही। उन्होंने बताया कि श्रीमद् भागवत कथा सुनने से मनुष्य के कई जन्मों के पापों का क्षय हो जाता है। हमें भागवत कथा सुनने के साथ-साथ उसकी शिक्षाओं पर भी अमल करना चाहिए। उन्होंने बताया कि वामन अवतार के रूप में भगवान विष्णु ने राजा बलि को यह शिक्षा दी कि दंभ और अहंकार से जीवन में कुछ भी हासिल नहीं होता और यह धन-संपदा क्षणभंगुर होती है। इसलिए हमें इस जीवन में परोपकार करना चाहिए। उन्होंने बताया कि अहंकार, गर्व, घृणा और ईर्ष्या से मुक्त होने पर ही मनुष्य को ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। कुटिल और स्वार्थी व्यक्ति जीवन में कभी तरक्की नहीं कर सकता। ऐसे व्यक्तियों को भगवान सूर्य, वायु, नदियों, बादलों व वृक्षों इत्यादि से प्रेरणा लेनी चाहिए। भगवान सूर्य बिना किसी भेदभाव के सृष्टि के सभी प्राणियों को अपना प्रकाश देते हैं। वायु सभी जीवों में प्राणों का संचार करती है। बादल परोपकार के लिए गरजते हुए वर्षा करते हैं, नदियां किसी से नहीं पूछती कि तुम मेरा जल क्यों पीते हो और वृक्ष भी किसी व्यक्ति से यह नहीं पूछते कि तुम मेरे फल क्यों तोड़ते हो। लेकिन स्वार्थी मानव ईर्ष्यालु होता जा रहा है। यदि आप अपना उद्धार करना चाहते हैं तो परोपकार में अपना जीवन लगाएँ, जिससे सबका कल्याण होगा। कथाक्रम में श्रीराम जन्म प्रसंग के दौरान उन्होंने कहा कि जब अयोध्या में भगवान राम का जन्म होने वाला था, तब समस्त अयोध्या नगरी में शुभ शगुन होने लगे। भगवान राम का जन्म होने पर अयोध्या नगरी में खुशी का माहौल हो गया। चारों ओर मंगलगान होने लगे। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने भी पृथ्वी लोक पर आकर धर्म की स्थापना की। कथावाचक ने कहा कि आज का व्यक्ति ईश्वर की सत्ता को मानने से भले ही इंकार कर दे, लेकिन एक-न-एक दिन उसे ईश्वर की महत्ता को स्वीकार करना ही पड़ता है। संसार में जितने भी असुर उत्पन्न हुए सभी ने ईश्वर के अस्तित्व को नकार दिया और स्वयं भगवान बनने का ढोंग करने लगे, लेकिन जब ईश्वर ने अपनी सत्ता की एक झलक दिखाई तो सभी का अस्तित्व धरा से ही समाप्त हो गया। अधर्म के मार्ग पर चलनेवाला व्यक्ति कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो, उसका अंत निश्चित है। श्रीहरि के जन्म की कथाओं का रसपान कराते हुए व्यासजी ने श्रीकृष्ण जन्म का बड़ा ही मार्मिक प्रसंग सुनाकर समुपस्थित भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान कथा पंडाल में प्रसिद्ध भजन ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ पर सभी श्रद्धालु काफी देर तक झूमते व थिरकते रहे। श्रीकृष्ण-जन्मोत्सव कार्यक्रम को लेकर कथा पंडाल को गुब्बारे व फूल-माला सहित आकर्षक ढंग से सजाया गया था। कथावाचक प्रेमाचार्यजी महाराज ने प्रवचन के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं का वर्णन कर धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की महत्ता पर सारगर्भित विचार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जब-जब अत्याचार, अनाचार व अन्याय बढा है, तब-तब प्रभु का अवतार होता है। अत्याचार को समाप्त कर धर्म की स्थापना को लेकर ही प्रभु का अलग-अलग रूपों में अवतार होता है। जब कंस ने सभी मर्यादायें तोड दी, तो प्रभु श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। कथा के दौरान बासुदेव, यशोदा व श्रीकृष्ण के बाल-रूप की झाँकी देख सभी श्रद्धालु जयकारा लगाते हुए नृत्य करने लगे। अतः यदि जीवन में हमें अच्छे रास्ते पर जाना है, तो संकल्प लेना जरूरी है। हर बच्चे को अपने माता-पिता व गुरू की बातों को मानना चाहिए। जिन बच्चों के उपर माता-पिता का आशीर्वाद है, उन्हें संसार में सब कुछ प्राप्त है। हर एक माता-पिता को चाहिए कि अपने साथ बच्चों को भागवत कथा, सत्संग, कीर्तन में जरूर साथ लाएँ। धर्म की कथा सुनने से बच्चों में अच्छे संस्कार आते हैं। मौके पर सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति मंझौल के अध्यक्ष कन्हैया कुमार, कोषाध्यक्ष अमित कुमार सिंह गप्पू, सचिव सिम्मी शिवम सिंह, संयुक्त सचिव केशव सरकार, सदस्य गोपी, शिशुपाल सिंह, केशव, प्रवीण, संरक्षक विजय प्रसाद सिंह, मनोज भारती, गोविन्द, वीरू, सनातन, शिवम, धीरज, सन्नी, मुरारी, गुलशन, प्रियांशु, अजय कुमार चुलबुल, आदित्य, सचिन, रवि, छोटे, अनुराग, रिशुराज, श्यामजी समेत काफी संख्या में पुरुष एवं महिला श्रद्धालु मौजूद थे।




