रिपोर्ट अनमोल कुमार
पशुओं को गर्मी व लू से बचाने की कवायद
पशुपालन विभाग ने जारी की एडवाइजरी
पशुओं का पीने का पानी हर समय थोड़ा ठंडा रखना अत्यंत जरूरी: डी एच ओ डॉ राजेश
गर्मी का सीजन शुरू हो चुका है और तापमान 40 डिग्री तक पहुंच रहा है। ऐसे में पशुओं को गर्मी व लू से बचाने के लिए पशुपालन विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। पशुपालन विभाग के डी एच ओ डॉ राजेश ने बताया कि आने वाला समय गर्मी व लू का है। पशुओं को गर्मी में लू से बचाने के लिए पशुपालन विभाग द्वारा आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। उन्होंने सभी पशुपालकों से अपील की कि पशुओं की उत्पादन क्षमता को बनाए रखने व गर्मी की लू के कारण बीमार न होने से बचाने के लिए पशुपालन विभाग द्वारा जो आदेश दिये जाते है उनकी निरन्तरता पालना करें।
साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि पशुओं का शेड खुला एवं हवादार होना चाहिए तथा शेड की छत ऊंची होनी चाहिए। अगर शेड की छत टीन की बनी है तो उस पर पराली आद की परत डाल देनी चाहिए ताकि शेड के अंदर का तापमान कम रहे। पशुओं के शेड की दिशा पूर्व से पश्चिम की तरफ होनी चाहिए। पशु शेड के बाहर खुले में केवल घने छायादार वृक्ष के नीचे ही पशुओं को बांधे। पशुओं के शेड में पंखे व डेर्जट कूलर का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। पशुओं को कम से कम दो बार जोहड़ आदि में ले जाना चाहिए और पुशओं को पीने का पानी थोड़ा ठंडा पिलाना चाहिए।
छोटू पशुओं के पीने के पानी का रखें विशेष ख्याल।
छोटे पशुओं के लिए ध्यान रखा जाए कि पानी की होदी की ऊंचाई कम होनी चाहिए अन्यथा उसके लिए खुले मुंह का बर्तन में पानी पीने की व्यवस्था करें। गांव के सार्वजनिक स्थलों पर स्थित पानी की होदियों में पशुओं के पीने के लिए स्वच्छ पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करें। गर्मीयों में हरे चारे की कमी रहती है। इसलिए उपलब्धता सुनिश्चित कर लेनी चाहिए तथा हरे चारे का संरक्षण कर साइलेज को प्रयोग भी किया जा सकता है।
और पशुओं को आहार सुबह जल्दी व सायं को या रात को देना चाहिए। पशुओं को संतुलित व पौष्टिक आहार देना चाहिए तथा आहार में खनिज मिश्रण का प्रयोग अवश्य करें। उन्होंने बताया कि गर्मियों में भैंस मद के दौरान केवल तार देती है व बोलती नही है। इसलिए सुबह व सांय को पशु मद में है या नहीं है इसकी जांच अवश्य करवाएं। विदेशी नस्ल या संकर प्रजाति की गायों में इस मौसम में दूध उत्पादन में भारी कमी आ जाती है। इसलिए उन्हें उष्मीय तनाव से बचाने के लिए विशेष ध्यान देना अति आवश्यक है। यदि किसी पशु को लु लग जाए तो पशुपालक तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र में संपर्क कर सकते है और अपने पशु का इलाज करवा सकते हैं।




