रिपोर्ट- निभाष मोदी!
अंग जनपद की लोक कला मंजूषा कला अब किसी पहचान की मोहताज नहीं, मंजूषा कला एक चलंत कला है, जिसमें कब गुलाबी पीला और हरा तीन रंगों के विन्यासों को कलाकार बखूबी दर्शाते हैं ,यह कला अंग जनपद के लोक कला पर आधारित चांदो सौदागर बिहुला विषहरी की कहानी पर आधारित है, इसकी कला को अब बिहार के ही नहीं अन्य विश्वविद्यालय में भी बच्चे प्रशिक्षण ले रहे हैं और इस कला की पहचान आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं, ,कालिदास संस्कृत अकादमी उज्जैन मध्य प्रदेश विश्वविद्यालय के भी बच्चे अब मंजूषा कला का प्रशिक्षण लेकर इस क्षेत्र में आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं और इसका प्रशिक्षण भागलपुर के मनोज पंडित और उनके सहयोगी अमन पंडित दे रहे हैं जिसको लेकर आज उन्हें कालिदास संस्कृत अकादमी उज्जैन मध्य प्रदेश में सम्मानित भी किया गया है.





