रिपोर्ट अनमोल कुमार
कहा-जिन उद्देश्यों को लेकर जदयू में आए थे, पूरा नहीं हो सका; लालू-नीतीश पर बरसे
जदयू में घुटन महसूस कर रहे लोगों का नई पार्टी में स्वागत
जदयू अध्यक्ष ललन सिंह ने भी कहा-उपेंद्र अब जदयू में नहीं
पटना : लंबे समय से जदयू में ही रहकर बगावती तेवर अपनाए उपेंद्र कुशवाहा ने आखिरकार आज अपने पत्ते खोल ही दिए। उन्होंने नीतीश कुमार और जदयू से नाता तोड़ते हुए नई पार्टी राष्ट्रीय लोक जनता दल बनाने का ऐलान कर दिया। जदयू में ही अपने समर्थकों के साथ दो दिनों की बैठक के बाद उपेंद्र कुशवाहा की ओर से नई पार्टी बनाने का विधेयक पास किया गया। इसकी जानकारी उपेंद्र कुशवाहा ने पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके दी। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन उद्देश्यों को लेकर वह जदयू में आए थे वह पूरा नहीं हो सका। वहीं, दूसरी ओर जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने भी अब पुष्टि कर दी कि उपेंद्र कुशवाहा का जदयू से कोई नाता नहीं है। उपेंद्र कुशवाहा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि आज जदयू में जो भी घुटन महसूस कर रहे हैं उनका नई पार्टी में स्वागत है। उन्होंने कहा कि आज से नई राजनीतिक पारी की शुरुआत हो रही है। जदयू के तमाम साथी, बड़े नेता हो या साधारण कार्यकर्ता, दो चार अपवादों को छोड़कर सभी चिंता व्यक्त कर रहे थे। हम भी लगातार नीतीश कुमार को परेशानी बता रहे थे। लेकिन जदयू नेतृत्व द्वारा कोई पहल न होने पर हमने अपने साथी लोगों से विमर्श किया। जिसमें तय हुआ कि पार्टी के वैसे साथियों को बुलाया जाए जो चिंतित हैं। साथियों के साथ दो दिनों तक विमर्श के बाद नई पार्टी बनाने का निर्णय लिया गया है। बागी जदयू नेता कुशवाहा ने कहा कि लगभग दो साल पहले हम जदयू में आए। तब एक विशेष परिस्थिति राज्य में थी। नीतीश कुमार पर जिस विरासत को संभालने की जिम्मेवारी बिहार की जनता ने 2005 में पूरी तरह दी। उसके पहले कर्पूरी ठाकुर के निधन के बाद उनकी विरासत लालू यादव को दी थी। लालू यादव को जनता ने उन्हें अकूत ताकत भी दी। सत्ता में आने के बाद कुछ दिनों तक लालू यादव ने जनता की भावनाओं का ख्याल रखा, लेकिन कुछ दिनों बाद ही उनमें भटकाव आ गया। उस मिले जनसमर्थन का इस्तेमाल जनता के लिए हो सकता था। दूसरा समाज की अंतिम पंक्ति में खड़ा व्यक्ति को समाज की मुख्य धारा में जोड़कर किया जा सकता था। कर्पूरी ठाकुर की विरासत को आगे ले जा सकता था, लेकिन भटकाव के बाद लालू जी ने उस जन समर्थन का प्रयोग अपने परिवार के लिए करना शुरू कर दिया। जिसका खामियाजा वह आज तक भुगत रहे हैं। अपने संबोधन में उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि 1994 में समता पार्टी बनी और जॉर्ज फर्नांडीस के आशीर्वाद से नीतीश कुमार उस पार्टी के मुखिया बने। उस वक्त जो बिहार में अराजकता थी उसके खाते के लिए नीतीश कुमार के नेतृत्व में संघर्ष चला। वर्ष 2005 के बाद कर्पूरी ठाकुरी की वही विरासत नीतीश कुमार के पास आ गया, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। नीतीश कुमार ने अच्छा काम किया। बिहार विकास की राह पर आया। नीतीश कुमार ने बहुत ही अच्छा काम किया, लेकिन आखिर में सब बदतर होता चला गया।




