माफिया मस्त, पुलिस पस्त आखिर 3 मौत के जिम्मेदार कौन?

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पंकज कुमार ठाकुर के साथ धीरज शर्मा!

सरकार से लेकर अधिकारी तक दारूबंदी की कुलांचे भरते हैं। लेकिन हकीकत कुछ और बयां कर रहा है। जहां शराब माफिया पुलिस से एक कदम आगे हाईटेक होते जा रहे हैं। दरअसल यही यूं ही नहीं कहा जा रहा है। आंकड़ों पर अगर आप गौर करें तो शराब की कई बड़ी बड़ी खेप पकड़ी जाती है लेकिन शातिर गायब हो जाते हैं। लाजमी है ऐसे में शातिर अपने काम को बड़ा शातिरआना अंदाज में सर अंजाम दे रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि कई पुराने माफियाओं ने जब अपना स्याह लबादा छोड़ दिया। तो भागलपुर शहर के बीचोबीच एक नेटवर्क निमुछये शराब माफिया खड़े हो गए। जो भागलपुर पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई है।यदा-कदा 1,2 गुर्गे को पकड़कर पुलिस भले ही अपनी पीठ थपथपाने से गुरेज ना करें। और यह यूं ही नहीं कहा जा रहा है लोग बाग जिस तरह से मृतक के शरीर को लेकर पुख्ता दावे के साथ जहरीली शराब से मरने की पुष्टि कर रहे हैं। मरने वाले तो सरकार के लिए एक आंकड़ा है। लेकिन उन बेबसी आंसू का क्या जो दिल में टीस देकर नश्तर चुभो कर वह पडती है। यहां के लोगों ने हंगामे के दौरान चीख चीख कर दो शराब माफियाओं का नाम लिया। और जिस तरह से कहा जा रहा है कि पहले अगर कार्रवाई हो जाती। तो कई काल के गाल में समाने से बच सकते थे।क्या सत्तासीन सरकार से इन्हें बेहतर कल की उम्मीद नहीं। इधर सूत्र यह भी बताते हैं कि बिना पुलिसिया वरदहस्त के धंधा फूल फल ही नहीं सकता। सूत्र यहां तक बताते हैं कि इसीलिए कई अधिकारी कई सालों से यहां जमे हुए हैं। जिनकी पकड़ काफी लंबी हो चुकी है। खैर मामला जो भी हो फिलवक्त 3 मौत ने सब को झकझोर कर रख दिया है। हालांकि सरकार से लेकर प्रशासन बार-बार जहरीली मौत से मरने की पुष्टि अब तक नहीं कर रही है। अब इतने के बाद भी शराबबंदी की बात के करना कहीं ना कहीं बेमानी साबित हो रही है।

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