मुंगेर- तिरंगे में लिपटा गांव पहुंचा शहीद संजीव का शव,जयघोष से गुंजा ईलाका, परिजनों के नहीं थम रहे आँसू!

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रिपोर्ट – सुमित कुमार!

-जब तक सूरज-चांद रहेगा, संजीव तेरा नाम रहेगा और भारत माता की जय के नारों से सोमवार को स्वर्णडीह गांव गूंज उठा। 42 वर्षीय सीआरपीएफ जवान संजीव कुमार उर्फ मिट्ठू का पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। संजीव ने पटना के रुबन मेमोरियल अस्पताल में रविवार की रात 8:45 बजे इलाज के दौरान अंतिम सांस ली।

संजीव कुमार असम के कोकराझाड़ स्थित 10वीं बटालियन में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत थे। फरवरी में तबीयत बिगड़ने पर जांच के दौरान लीवर में संक्रमण का पता चला था। रुबन अस्पताल में इलाज के बाद स्वस्थ होकर वे ड्यूटी पर लौट गए थे। सितंबर में फिर तबीयत बिगड़ने पर मेडिकल लीव लेकर स्वर्णडीह स्थित घर आए और 7 सितंबर को पटना के रुबन अस्पताल में भर्ती हुए। बीमारी बढ़ जाने के कारण इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

संजीव ने देश सेवा के संकल्प के कारण विवाह नहीं किया था। गरीब ब्राह्मण परिवार में जन्मे संजीव के पिता नवीन झा बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। दो भाइयों और एक बहन में संजीव छोटे थे। नौकरी मिलने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ। बहन लभली कुमारी की शादी भी देश सेवा करने वाले जवान निर्मल कुमार से हुई है। बड़े भाई मयंक झा खेती करते हैं।

पार्थिव शरीर को देखते ही मां उषा देवी दहाड़ मारकर रोने लगीं। वह बार-बार बेटे को आवाज देकर उठाने की कोशिश करती रहीं। भाभी रुपम देवी भी रोते हुए कहती रहीं कि एक बार उठकर उनसे बात कर लें। बहन लभली कुमारी भी भाई को याद कर रोते-रोते बेहोश हो गईं। पिता नवीन झा बेटे की मौत से पूरी तरह टूट गए। उन्होंने कहा कि बेटे ने जीवनभर ईमानदारी से मेहनत कर परिवार को सुख दिया, लेकिन भगवान को शायद यह भी मंजूर नहीं था। उन्होंने सरकार और विभाग से बड़े बेटे मयंक झा को अनुकंपा के आधार पर देश सेवा का अवसर देने की मांग की।

पार्थिव शरीर पहुंचते ही सैकड़ों ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। महिलाएं, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग सभी अपने गांव के लाल की एक झलक पाने को आतुर दिखे। सभी की आंखें नम थीं। चचेरे भाई अधिवक्ता राजेश झा ने कहा कि संजीव बेहद हिम्मती था और देश के लिए मर मिटने का जज्बा रखता था।

नगर पंचायत के वार्ड पार्षद प्रतिनिधि बब्लू कुमार सिंह ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि गांव ने अपना एक रत्न खो दिया। अभिमन्यु कुमार सिंह, सौरभ सिंह, साजू सिंह, बंटी झा, प्रभाकर सिंह, पूर्व मुखिया जय किशोर मंडल तथा उनके बचपन के साथी सन्नी, राकेश और राजीव समेत दर्जनों युवाओं ने भी श्रद्धांजलि दी।

सीआरपीएफ मोकामा से पार्थिव शरीर के साथ आए इंस्पेक्टर राम प्रकाश महतो ने बताया कि संजीव कोकराझाड़ में कांस्टेबल के पद पर तैनात थे। स्वास्थ्य कारणों से उन्हें पदोन्नति नहीं मिल सकी, लेकिन वे बेहद हिम्मती जवान थे और किसी भी मोर्चे पर 24 घंटे तैयार रहते थे। उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ ने एक कर्मठ और साहसी साथी खो दिया है। पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटकर पूरे सम्मान के साथ लाया गया। उनका अंतिम संस्कार सुल्तानगंज के उत्तरवाहिनी गंगा घाट पर किया जाएगा।

बाइट-नवीन झा पिता
बाइट-राजेश झा एडवोकेट
बाइट-राम प्रकाश महतो सीआरपीएफ इंस्पेक्टर

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