भागलपुर-ट्रैक्टर पर सवार हो गईं सीओ हर्षा कोमल,पानी में उतरकर बाढ़ पीड़ितों तक पहुंचा रहीं राहत!

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रिपोर्ट – निभाष मोदी!

जब रास्ते खत्म हुए तो ट्रैक्टर पर सवार हो गईं सीओ हर्षा कोमल! कमरभर पानी में उतरकर बाढ़ पीड़ितों तक पहुंचा रहीं राहत—भागलपुर में अफसर की अनोखी ‘ग्राउंड जीरो’ तस्वीर ने जीता लोगों का दिल

भागलपुर। 10 सितंबर,2026,गंगा के उफान ने भागलपुर के कई इलाकों में जिंदगी की रफ्तार थाम दी है। कहीं सड़कें पानी में डूबी हैं, कहीं खेत नदी का हिस्सा बन चुके हैं तो कहीं घरों तक पहुंचने के रास्ते ही गायब हो गए हैं। लेकिन इस मुश्किल घड़ी में प्रशासनिक अमले की एक तस्वीर ऐसी सामने आई है, जिसने राहत कार्यों को लेकर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।यह तस्वीर है शाहकुंड की अंचलाधिकारी हर्षा कोमल की, जो बाढ़ प्रभावित इलाकों में सिर्फ दफ्तर से आदेश जारी करती नजर नहीं आ रहीं, बल्कि खुद ग्राउंड जीरो पर उतरकर राहत पहुंचाने में जुटी हैं।जहां सामान्य वाहन पहुंचने की स्थिति नहीं है, वहां सीओ ने ट्रैक्टर का सहारा लिया। जहां ट्रैक्टर भी आसानी से नहीं जा सकता, वहां पानी के बीच उतरकर प्रभावित परिवारों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। उनके साथ अधीनस्थ अधिकारी और कर्मचारी भी लगातार राहत अभियान में लगे हुए हैं।
रास्ता बंद मिला तो रास्ता बनाया, पानी बढ़ा तो पानी में उतर गईं
शाहकुंड प्रखंड की कई पंचायतें बाढ़ की गंभीर स्थिति से जूझ रही हैं। खुलनी, पैरडो मोमिन्या माल, बेलथू, खैरा, मकंदपुर और दरियापुर पंचायत के कई गांवों में बाढ़ का असर साफ दिखाई दे रहा है।इन इलाकों में कई जगह सड़क और संपर्क मार्ग जलमग्न हैं। ऐसे में राहत सामग्री को प्रभावित परिवारों तक पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं। लेकिन सीओ हर्षा कोमल ने राहत अभियान को सिर्फ कागजों और सरकारी वाहनों तक सीमित नहीं रखा।
वह खुद प्रभावित इलाकों में पहुंच रही हैं और जहां जरूरत पड़ रही है, वहां ट्रैक्टर से दुर्गम रास्तों को पार कर रही हैं। कई स्थानों पर पानी के बीच जाकर लोगों से हालचाल लिया जा रहा है और जरूरत के मुताबिक सहायता सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
अफसर नहीं, परिवार के सदस्य की तरह पहुंच रही हैं सीओ
बाढ़ की सबसे बड़ी परेशानी सिर्फ पानी नहीं होता। जब पानी घरों के आसपास जमा हो जाए तो राशन, भोजन, पशुचारा और दूसरी जरूरी चीजें जुटाना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे समय में प्रशासन का कोई अधिकारी जब खुद लोगों के बीच पहुंचता है तो पीड़ित परिवारों के लिए उसका असर अलग होता है।
शाहकुंड में भी कुछ ऐसी ही तस्वीर दिखाई दे रही है। सीओ हर्षा कोमल प्रभावित गांवों में जाकर लोगों से सीधे बातचीत कर रही हैं। उनकी कोशिश है कि राहत सामग्री जरूरतमंदों तक पहुंचे और बाढ़ के कारण किसी परिवार को जरूरी सहायता के लिए भटकना न पड़े।
स्थानीय बाढ़ पीड़ित भी अंचलाधिकारी के इस अंदाज की सराहना करते नजर आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि आपदा के समय अधिकारी अगर खुद गांव तक पहुंचें तो प्रशासन पर भरोसा और मजबूत होता है।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद तेज हुआ राहत अभियान
बिहार में बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर जिला प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों को गति दी जा रही है। जिलाधिकारी के निर्देश पर प्रभावित प्रखंडों में अधिकारी और कर्मचारी लगातार क्षेत्र में मौजूद रहकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।इसी कड़ी में शाहकुंड में भी प्रशासन की टीम प्रभावित पंचायतों और गांवों तक पहुंचकर लोगों की जरूरतों का जायजा ले रही है।लेकिन इस पूरी तस्वीर में सीओ हर्षा कोमल का अंदाज इसलिए अलग दिखाई दे रहा है, क्योंकि वह उन जगहों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं जहां पहुंचना आसान नहीं है।
बाढ़ के पानी के बीच एक संदेश—प्रशासन आपके दरवाजे तक पहुंचेगा
आपदा के समय प्रशासन की असली परीक्षा दफ्तर में नहीं, बल्कि ग्राउंड जीरो पर होती है। शाहकुंड की तस्वीर यही संदेश देती नजर आ रही है।ट्रैक्टर पर बैठकर बाढ़ प्रभावित इलाकों की ओर जाती सीओ, पानी के बीच लोगों तक पहुंचती प्रशासनिक टीम और राहत सामग्री मिलने के बाद लोगों के चेहरों पर दिखाई देती राहत—ये तस्वीरें बताती हैं कि मुश्किल समय में सरकारी तंत्र की संवेदनशीलता कितनी मायने रखती है।
गंगा का पानी भले ही रास्ते रोक रहा हो, लेकिन शाहकुंड में राहत पहुंचाने की कोशिशें रुकती नहीं दिख रहीं।क्योंकि जब सड़कें डूब गईं, तब प्रशासन ने ट्रैक्टर का रास्ता चुना… और जब पानी रास्ते में आया, तो सीओ हर्षा कोमल खुद पानी में उतर गईं।

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