रिपोर्टर — राजीव कुमार झा!
मधुबनी जिले के झंझारपुर से मानवीयता संवेदना को झकझोर कर रख देने बाली मामले मे सूनबाई करते हुए एक दोहरे हत्याकांड की घटना में झंझारपुर की अदालत ने इतिहास रचते हुए दोषी माँ और उसके प्रेमी को फाँसी की सज़ा सुनाई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश-2, अभिषेक रंजन की अदालत ने इस दोहरे हत्या कांड की जघन्य वारदात को ‘दुर्लभतम’ श्रेणी में रखते हुए यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
निर्मम हत्याकांड मे प्रेम के चक्कर में अपनी ही संतान की जान मार देने से संबंधित है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, नरही गाँव, थाना अंधरामठ के प्रमोद कुमार साफी की पत्नी अनिता कुमारी ने 3 जुलाई 2023 को अपने चार वर्षीय पुत्र प्रिंस और डेढ़ वर्षीय पुत्री सृष्टि को साथ लेकर घर से बाहर निकल गई , जो बाद में उन मासूमों के लिए आखिरी दिन साबित हुआ। प्रेमी जय प्रकाश मंडल के साथ साजिश के तहत, अनिता ने अपने ही दोनो मासूम बच्चों को प्रेम-संबंधों में बाधा मानते हुए उनकी बेरहमी से हत्या कर दी।
और बूत मिटाने के लिए शवों को बलान नदी की उफनती लहरों में फेंक दिया गया। घटना के सात दिनों बाद प्रिंस का शव बरामद तो कर लिया गया, लेकिन मासूम सृष्टि नदी की तेज़ धारा में बह गई और उसका अभी तक पता नहीं चल सका।
इस दील दहला देने वाली मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने प्रेमी प्रेमका को पकड़कर पुलिस को सौंपा दिया था।
इस जघन्य वारदात से पूरा इलाका स्तब्ध रह गया। गुस्साए ग्रामीणों ने मौके पर ही आरोपी माँ और उसके प्रेमी को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। 11 जुलाई 2023 से दोनों न्यायिक हिरासत में है। इस पूरे मामले ने समाज के लोगों के हृदय को झकझोर कर रख दिया था।
अदालत ने मामले को काफी गंभीर मानते हुए अपने टिप्पणी मे कहा है कि यह अपराध सामान्य नहीं, अद्वितीय रूप से राक्षसी कृत है।
अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक देव शंकर झा और वादी के अधिवक्ता जगदीश प्रसाद यादव व बलराम यादव ने अपने अपने पक्ष को रखा। वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता बालेश्वर गुरमैता व शिवचंद्र कुमार ने दलीलें पेश कीं।
सभी 24 गवाहों, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और ठोस सबूतों को परखने के बाद अदालत ने निर्णय सुनाया। न्यायाधीश ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा है कि यह हत्याकांड इतना निर्दयी और अमानवीय है कि यह सामान्य अपराधों की श्रेणी से परे है। इसने मानवीय करुणा पर शर्म का टीका लगा दिया है। ऐसे कलंकित कृत्य को केवल कठोरतम सज़ा से ही समाज को आईना दिखाया जा सकता है।
इस के साथ ही न्यायालय द्वारा दिए गए सज़ा का विवरण मे धारा 302 (हत्या): दोनों को फाँसी की सज़ा और ₹50,000 का जुर्माना लगाया गया। जुर्माना न देने पर 6 माह अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतना होगा।
धारा 201/34, साक्ष्य मिटाने के आरोप मे 7 साल की सश्रम कारावास एवं ₹10,000 जुर्माना लगाया गया। जुर्माना न देने पर 3 माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
न्यायालय द्वारा सुनाए गए इस फैसले को लोगों ने ऐतिहासिक फैसला मानते हुए स्वागत किया है। वही लोगों का मानना है कि इस तरह के फैसले से ही आज न्यायालय को लेकर लोगो का भरोसा कायम है।
झंझारपुर के न्यायिक इतिहास में यह पहली बार है जब किसी अभियुक्त को मृत्युदंड की सज़ा सुनाई गई है। अदालत ने इस फैसले को “रेरेस्ट ऑफ रेयर” (दुर्लभतम से भी दुर्लभ) केस के रूप में परिभाषित किया है। इस ऐतिहासिक सज़ा ने माँ को “ममता” नहीं, बल्कि “निर्दयता” की मिसाल बना दिया है।



