रिपोर्ट – आशुतोष पांडेय
आरा। वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय की प्रशासनिक सुस्ती के कारण सैकड़ों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित पीएचडी प्रवेश परीक्षा (PAT-2025) में स्नातकोत्तर (PG) अंतिम सेमेस्टर के ‘Appearing’ छात्रों को भी शामिल होने की अनुमति दी गई थी। परीक्षा के बाद बीते 22 अप्रैल 2026 को PAT-2025 का परिणाम घोषित कर दिया गया, जिससे सफल अभ्यर्थियों में खुशी की लहर दौड़ गई।
परिणाम जारी होने के तुरंत बाद विभिन्न स्नातकोत्तर विभागों ने डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन एवं नामांकन प्रक्रिया की तिथियां भी घोषित कर दीं। सफल अभ्यर्थियों को अपने मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया गया है।
हालांकि, दूसरी ओर विश्वविद्यालय अब तक स्नातकोत्तर अंतिम सेमेस्टर का परीक्षा परिणाम जारी नहीं कर सका है। ऐसे में PAT-2025 में सफल हुए ‘Appearing’ श्रेणी के छात्र भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। पीजी का रिजल्ट नहीं आने के कारण उनके पास अंतिम अंकपत्र और डिग्री उपलब्ध नहीं है, जिससे वे डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पा रहे हैं।
छात्रों
का कहना है कि उन्होंने कठिन परिश्रम के बाद पीएचडी प्रवेश परीक्षा में सफलता प्राप्त की है, लेकिन विश्वविद्यालय की लापरवाही के कारण उनकी उपलब्धि पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। यदि समय रहते पीजी का परिणाम घोषित नहीं किया गया, तो PAT-2025 में सफल होने के बावजूद उनका नामांकन रद्द होने की आशंका है।
इस मुद्दे को लेकर छात्रों में गहरा आक्रोश और निराशा व्याप्त है। प्रभावित अभ्यर्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से अविलंब पीजी अंतिम सेमेस्टर का परिणाम जारी करने की मांग की है, ताकि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर नामांकन प्रक्रिया पूरी कर सकें।
फिलहाल परीक्षा बोर्ड और विश्वविद्यालय प्रशासन की धीमी कार्यशैली के कारण सैकड़ों होनहार छात्रों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।




