आरा/आशुतोष पाण्डेय
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
आरा। शहर के बस पड़ाव और स्टेशन रोड पर अवैध वसूली, सड़क पर फैला अतिक्रमण और रॉन्ग साइड से आने-जाने वाले वाहनों ने यातायात व्यवस्था को पूरी तरह चरमरा दिया है। स्थिति यह है कि बीते एक महीने में 5 सड़क हादसे हो चुके हैं, जिनमें हाल ही में एक ASI की दर्दनाक मौत के बाद भी प्रशासनिक कार्रवाई का अभाव जनता के बीच आक्रोश और प्रश्न दोनों खड़े कर रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, स्टेशन रोड और बिहार मिल रोड पर दो स्थानों पर नगर निगम के नाम पर अवैध वसूली का खेल बेधड़क जारी है। इसी वसूली के कारण वाहन बीच सड़क रोक दिए जाते हैं, जिससे जाम की स्थिति बनती है और गाड़ियाँ रॉन्ग साइड में चढ़कर निकलने को मजबूर होती हैं। यही अव्यवस्था हादसों को लगातार न्योता दे रही है।
व्यापारियों और राहगीरों का कहना है कि सड़क का लगभग आधा हिस्सा ठेला–हॉकर्स और अस्थायी कब्जों ने घेर रखा है। नतीजतन पैदल चलने की जगह नहीं और वाहनों के लिए सुरक्षित मार्ग तो बिल्कुल नहीं बचता। सुबह-शाम यातायात कई घंटों तक ठप हो जाता है।
लोगों ने आरोप लगाया कि अवैध वसूली + अतिक्रमण ने मिलकर सड़कों को जानलेवा बना दिया है। ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी नाम मात्र की है, जबकि प्रशासन ने अब तक ठोस कदम उठाने की जरूरत महसूस नहीं की है।
एक एएसआई की मौत और लगातार हो रहे हादसों के बाद भी संबंधित विभागों की चुप्पी पर अब आमजन खुलकर सवाल उठा रहे हैं—
कब हटेगा यह अवैध कब्जा? कब रुकेगी अवैध वसूली? कब सुधरेगी आरा की यातायात व्यवस्था?
शहरवासियों की मांग है कि जल्द से जल्द अभियान चलाकर अवैध वसूली को खत्म किया जाए, सड़क किनारे का अतिक्रमण हटाया जाए और रॉन्ग साइड चलने वाले वाहनों पर सख्त कार्रवाई की जाए, तभी हादसों का सिलसिला रुक सकेगा।




