रिपोर्ट – संतोष चौहान!
सुपौल :- जिले के त्रिवेणीगंज अनुमंडल क्षेत्र में मुखिया जी के नाम से चर्चित मानगंज निवासी प्रोफेसर मोल प्रसाद सिंह लगभग सौ वर्ष की आयु में स्वर्ग सिधार गए। उन्होंने अपने पीछे तीन पुत्र एवं एक पुत्री को छोड़ गए।
सुपौल शहर के विद्यापुरी स्थित अपने आवास पर वे अंतिम सांस लिए। उनके निधन की खबर सुनकर इलाके में शोक की लहर छा गई। उनके अंतिम दर्शन के लिए विद्यापुरी आवास पर लोगों का तांता लगा रहा। उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव त्रिवेणीगंज के मानगंज में किया गया। उनके ज्येष्ठ पुत्र भवेश कुमार सिंह ने मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में इलाके के बड़ी तादाद में लोगों ने भाग लिया।
ज्ञात हो कि मोल बाबू निर्वाचित मुखिया नहीं थे, लेकिन इलाके में उनकी लोकप्रियता,पहचान एवं भूमिका किसी निर्वाचित मुखिया – सरपंच से कम नहीं थी। उन्होंने अपने जीवन काल में सामाजिक पंचायत के माध्यम से कठिन से कठिन समस्या एवं विवाद को सुलझाने में उन्हें महारत हासिल थी। जिसकी प्रशंसा पुलिस पदाधिकारी भी किया करते थे। वे गरीबों की मदद एवं धार्मिक आयोजनों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते थे। सामाजिक कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए उन्हें सामाजिक न्याय के पुरोधा कहा जाता था। मोल बाबू एम एस कालेज मोतिहारी में प्राध्यापक के पद पर सेवा दे चुके थे। उनका जीवन शिक्षा, समाजसेवा एवं सादगी का प्रतीक रहा। उनके निधन से समाज को अपूरणीय क्षति हुई है। इलाके के लोगों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
मोल बाबू अपने पीछे बड़े पुत्र भवेश कुमार सिंह, पुत्री ललिता सिंह, द्वितीय पुत्र सुपौल के चर्चित अधिवक्ता ब्रजेश कुमार सिंह एवं छोटे पुत्र शैलेश कुमार सिंह सहित भरा-पूरा परिवार को छोड़ गए।



