रिपोर्ट – रुपेश कुमार!
औरंगाबाद सदर अस्पताल में दिव्यांगों को यूआईडी कार्ड बनवाने के लिए जिलाधिकारी के द्वारा एक विशेष कैंप लगाने का आदेश सिविल सर्जन को प्रेषित किया गया था और इसकी सूचना दिव्यांगों को भी दी गई थी। सूचना पर आज जिले के दूर दराज क्षेत्रों से काफी संख्या में दिव्यांग आए मगर आज के जांच शिविर में जिस महिला चिकित्सक की डयूटी लगाई गई थी। वह उपस्थित नहीं हुई। महिला चिकित्सक के नहीं आने से न तो दिव्यांगों की जांच हुई और न ही उनका यूआईडी कार्ड ही बन सका। ऐसी स्थिति में चिकित्सक के न आने से दिव्यांग जन और उनके साथ आए परिजन बेहद आक्रोशित हो गए और हंगामा करने लगे। दिव्यांगों के परिजनों ने बताया कि वे लोग सुबह से ही यूआईडी कार्ड बनवाने के लिए दूर दूर से इस गर्मी में आए है। लेकिन सदर अस्पताल में कार्ड बनाने के लिए कोई चिकित्सक नहीं पहुंचे। जो डीएम के आदेश की अवहेलना है। उनके द्वारा इसकी सूचना जिला पदाधिकारी को भी दी गई। जिनके निर्देश पर प्रभारी सिविल सर्जन डॉ रवि रंजन सदर अस्पताल पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी प्राप्त की। इधर प्रभारी सीएस ने सिविल सर्जन कार्यालय से जानकारी प्राप्त की तो जानकारी मिली कि यहां से संबंधित महिला चिकित्सक को सूचना भेजी गई थी। बावजूद वह नहीं आई। प्रभारी सीएस ने उक्त माहिला चिकित्सक को कैंप में न आने का कारण पूछा तो उन्होंने ऐसी किसी भी प्रकार की सूचना मिलने से अनभिज्ञता जताई। प्रभारी सीएस ने पूरे मामले की जांच की बातें कही। उन्होंने बताया कि आज हड्डी रोग के विशेषज्ञ के नहीं होने के कारण वे नहीं आ सके है। जिनका यूआईडी कार्ड नहीं बना है उनके लिए 15 मई को आयोजित कैंप में बनाया जाएगा। बाकी जो दिव्यांग यहां मौजूद हैं उनकी जांच कराई जा रही है। हालांकि इस मामले में सवाल उठता है कि आखिर जिलाधिकारी के आदेश के बाद भी सीएस कार्यालय का सिस्टम किस तरह से काम करता है कि चिकित्सकों को इसकी सूचना नहीं मिली और उसके अलावे जिन्हें आना था वे क्यों नहीं पहुंच पाए। सिस्टम की उदासीनता से इस भीषण गर्मी में आए दिव्यांगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी और उन्हें बिना यूआईडी कार्ड के बेरंग लौटना पड़।




