रिपोर्टर– राजीव कुमार झा
दोष सिद्धि दर बढ़ाने, पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने एवं कानून-व्यवस्था सुदृढ़ करने पर विशेष जोर
– मधुबनी जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने समाहरणालय स्थित सभा कक्ष में स्पीडी ट्रायल, आर्म्स एक्ट एवं सामान्य वादों से संबंधित लंबित मामलों के त्वरित एवं प्रभावकारी निष्पादन को लेकर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक में जिला अभियोजन पदाधिकारी (डीपीओ), सहायक अभियोजन पदाधिकारी (एपीओ), लोक अभियोजक (पीपी), सहायक लोक अभियोजक (एपीपी), पुलिस प्रतिनिधि सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि स्पीडी ट्रायल से संबंधित सभी मामलों का निष्पादन प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि सामान्य वादों में भी प्रगति लाते हुए लंबित मामलों की संख्या में ठोस कमी लाई जाए।
जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि प्रत्येक वाद में राज्य का पक्ष सशक्त एवं प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाए, ताकि अधिकाधिक मामलों में दोष सिद्धि सुनिश्चित हो सके। उन्होंने अभियोजन एवं अनुसंधान के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
बैठक में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम, अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, मद्य निषेध, एक्साइज एक्ट, एनडीपीएस एक्ट सहित हत्या, डकैती, बलात्कार एवं शस्त्र अधिनियम से संबंधित गंभीर मामलों की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने इन मामलों को चिन्हित कर प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
जिलाधिकारी ने वादों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा करते हुए यह आकलन किया कि किस स्तर पर कितने मामले लंबित हैं तथा उनके लंबित रहने के कारण क्या हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से बिंदुवार जानकारी लेते हुए लंबित वादों के त्वरित निस्तारण हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
डीएम ने कहा कि आर्म्स एक्ट से जुड़े वादों का शीघ्र निष्पादन कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को आपसी समन्वय एवं सतत संवाद बनाए रखते हुए कार्य करने का निर्देश दिया, ताकि वादों के निष्पादन में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी न हो।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग, समयबद्ध समीक्षा एवं सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान पर बल दिया। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे समन्वय के साथ कार्य करते हुए समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें।
जिलाधिकारी ने कहा कि पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। निर्धारित दिशा-निर्देशों के प्रभावी अनुपालन से न केवल वादों के निष्पादन में तेजी आएगी, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी एवं परिणामोन्मुख बनेगी।




