रिपोर्ट अनमोल कुमार
गयाजी। जीवन विद्या कार्यशाला को संबोधित करते हुए आचार्य नवीन ने कहा कि नवरात्रि का अर्थ केवल व्रत और उपवास नहीं है बल्कि नव मूल्यों का जागरण है। उन्होंने नव मूल्यों कु विवेचना करते हुए कहा कि वह नव मूल्यों में विश्वास, सम्मान, गौरव, ममता, वात्सल्य, स्नेह, श्रद्धा, कृतज्ञता और प्रेम शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि नवरात्रि का समय अपने अंदर के आसुरी प्रवृत्तियों को त्याग करना है । उन्होंने कहा कि उन आसुरी प्रवृत्तियों में काम, क्रोध, मोह, मद, मत्सर पर विजय पाना है।
आचार्य नवीन ने कहा कि देवी शक्ति का अर्थ है, जीवन में विवेक और मूल्यों को सक्रिय करना। उन्होंने कहा कि नवरात्रि हमें स्मरण कराती है कि सुख और शांति बाहरी साधनों से नहीं बल्कि संबंधों में तृप्तिपूर्वक जीने से मिलती है। नवरात्रि में हमें आत्म- संयम, आत्म – संवाद और आत्म सुधार से अपने जीवन को मानवीय गुणों से आलोकित करें। रिपोर्ट अनमोल कुमार।




