रिपोर्ट- निभाष मोदी
सावन का पवित्र महीना चल रहा है और शिवभक्ति की ऐसी मिसालें देखने को मिल रही हैं, जो सच में रोंगटे खड़े कर देती हैं।
यूँ तो बाबा बैद्यनाथ धाम की 105 किलोमीटर की कठिन यात्रा हर साल लाखों श्रद्धालु तय करते हैं, लेकिन कुछ भक्त ऐसे भी होते हैं जिनकी भक्ति, जिनका समर्पण, और जिनका हठयोग देखकर आप भी भावविभोर हो उठेंगे।
कोई साधारण कांवड़ लेकर चल रहा है, कोई डाक बम बनकर दौड़ते हुए बाबा के दरबार तक पहुँच रहा है, तो कोई दांडी बम बनकर अपने हर दुख की दवा भोलेनाथ से माँगने चला है।
लेकिन अब हम आपको जो दृश्य दिखाने जा रहे हैं, वो इस सावन में सबसे अलग है — ये हैं हठयोगी शिवभक्त, जो आंखों पर पट्टी बांधकर, अंधकार में विश्वास के उजाले के सहारे बाबा से मिलने निकल पड़े हैं।
इनमें से कोई अपनी मन्नत पूरी होने पर यह कठिन व्रत निभा रहा है, तो कोई अपनी पीड़ा, अपनी माँग लेकर बाबा के दरबार में अर्जी लगाने निकला है। ये भक्त कहते हैं —
“भोलेनाथ अंतर्यामी हैं, वो औघड़दानी हैं। जिन्हें न तो दिखावा चाहिए, न दिखने की ज़रूरत। वो मन की बात जान लेते हैं और सबकी मुरादें पूरी करते हैं।”
बिहार के अलग-अलग जिलों से आए इन हठयोगियों की साधना, उनकी आस्था और उनका आत्मविश्वास वाकई अद्भुत है।
हठयोगी श्रद्धालु बोलते हैं: “मैंने मन्नत माँगी थी, मेरी बेटी ठीक हो गई… इसलिए पट्टी बांधकर बाबा के दरबार जा रहा हूँ…”
“भोले बाबा सब जानते हैं, बस सच्चे मन से बुलाओ, वो जरूर सुनते हैं।”
इन दृश्यों को देखकर साफ़ है कि भक्ति में कोई सीमा नहीं होती — न शरीर की, न सोच की, न दृष्टि की। यह महज़ यात्रा नहीं, यह आत्मा और शिव के बीच की अटूट कड़ी है।




